Tag: मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान

  • मध्य प्रदेश के बारे में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्नों की सार संग्रहिका (Part-1)

    इस लेख में मध्य प्रदेश के बारे में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्नों की सार संग्रहिका (part-1) को प्रस्तुत किया गया है।

    मध्य प्रदेश के बारे में पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्नों की सार संग्रहिका (Part-1)

    • मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा इंडोर स्टेडियम कहां स्थित हैं – इंदौर
    • जनसंख्या की दृष्टि से मध्य प्रदेश का सबसे छोटा जिला है – हरदा
    • मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे? – पडित रवि शंकर शुक्ल
    • ‘भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से मध्य प्रदेश में ज्योतिर्लिंगों की संख्या है – 2
    • मांडू किससे संबंधित है? – रानी रूपमती
    • मध्य प्रदेश की कौन-सी जनजाति जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ी है? – भील
    • मूर्तिकला का प्रसिद्ध स्थान फढ़के/फड़के स्टूडियो कहां स्थित है – धार
    • मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष अखिल भारतीय शास्त्रीय नृत्य उत्सव कहां आयोजित किया जाता है? – खजुराहो
    • मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र मध्य प्रदेश के किस जिले में स्थित है? – रायसेन
    • मध्य प्रदेश के किस जिले में रेलवे स्लीपर बनाने का कारखाना स्थित है? – सीहोर
    • मध्य प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री कौन थीं – सुश्री उमा भारती
    • जलदीप योजना मध्य प्रदेश शासन ने प्रारंभिक तौर पर किस जलाशय से प्रारंभ की? – इंदिरा सागर
    • वर्तमान में मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कौन हैं?
    • 1 नवम्बर, 2000 को मध्य प्रदेश के विभाजन के समय मुख्यमंत्री कौन थे? – दिग्विजय सिंह
    • रिलायंस समूह को मध्य प्रदेश में कोल बेड मीथेन के भंडार कहा मिले हैं? – सुहागपुर
    • दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय कहाँ स्थित है? – भोपाल
    • सांची स्तूप का निर्माण किसने करवाया था? – सम्राट अशोक
    • मध्य प्रदेश का महालेखाकार कार्यालय किस शहर में स्थित है? – ग्वालियर
    • आर.सी.वी.पी. नोरोन्हा प्रशासनिक अकादमी किस शहर में स्थित है? – भोपाल
    • सिविल अधिकार सरक्षण अधिनियम, 1955 अधीन सभी दंडनीय अपराध है – संज्ञेय तथा गैर जमानतीय
    • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 लागू हुआ था – 30 जनवरी 1990
    • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की उन्नति के लिए एक प्रावधान है, जो किसी एक सिंद्धात पर आधारित है – संरक्षा विभेद का सिद्धांत
    • कौन-सी शक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातिअधिनियम के अधीन विनिर्दिष्ट विशेष न्यायालय को नहीं दी गई है? – पुलिस से अतिरिक्त किसी व्यक्ति को अतिरिक्त अन्वेषण करने के लिए अधिकृत करना
    • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने के लिए सत्र न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में विनिर्दिष्ट करने का प्रयोजन है। – शीघ्र विचरण समयबद्ध विचरण तथा पीड़ितों के लिए विशेष सुरक्षा उपयुक्त सभी
    • भारतीय टाइगरों को बचाने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर किस वर्ष प्रारंभ किया गया था? – 1973
    • आल्हा-ऊदल संबंधित थे? – महोबा से
    • गुजरी महल किसने बनवाया था? – मानसिंह ने
    • नर्मदा नदी अपने उद्गम स्रोत – अमरकंटक से निकलती है।
    • मध्य प्रदेश का कौन-सा क्षेत्र गोंडवाना कहलाता है – दक्षिण-पूर्व क्षेत्र
    • अकबर के साथ युद्ध करने वाली दुर्गावती कहां की रानी थी? – मंडला
    • ओंकारेश्वर जल विद्युत संयंत्र से ऊर्जा उत्पन्न होती है – 520 मेगावाट
    • मध्य प्रदेश का क्षेत्रफल कितना है? – 308252 वर्ग किलोमीटर
    • भारत में सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है? – मध्यप्रदेश
    • कौन-सा राज्य बाघ राज्य कहा जाता है? – मध्यप्रदेश
    • सरदार सरोवर परियोजना किस नदी पर बनी है? – नर्मदा नदी
    • मध्य प्रदेश में एकमात्र आवासीय खेलकूद विद्यालय कहां स्थित है? – सीहोर
    • मध्य प्रदेश में कौन-सा खेल राज्य खेल घोषित किया गया है? – मलखम्भ
    • सतना स्थित सीमेंट कारखाना स्थापित किया है – बिड़ला कॉरपोरेशन
    • अमरकंटक स्थित है – मध्य प्रदेश में
    • चचाई जलप्रपात स्थित है – रीवा में
    • कृषि विश्वविद्यालय स्थित है – जबलपुर में
    • रक्षा गाड़ी कारखाना स्थित है – जबलपुर में
    • अंतिम जनगणना सर्वेक्षण (2011) के अनुसार मध्य प्रदेश की नगरीय जनसंख्या है – 1.60 करोड़
    • मध्य प्रदेश का जनसंख्या घनत्व है – 196
    • अंतिम जनगणना सर्वेक्षण (2011) के अनुसार मध्य प्रदेश में साक्षरता दर है – 63.7%
    • अंतिम जनगणना सर्वेक्षण (2011) के अनुसार मध्य प्रदेश में लिंग अनुपात है – 919
    • भारतीय खेल प्राधिकरण की मध्य क्षेत्रीय परिषद स्थित है – भोपाल में
    • अरावती एवं विध्य श्रृंखलाओं के मध्य कौन-सा पठार स्थित है? – मालवा का पठार
    • वर्ष 2008 में मध्य प्रदेश में दो नए जिले गठित किए गए थे – सिंगरौली एवं अलीराजपुर
    • निम्नलिखित में से कौन-सा शहर भारतीय स्थानीय मानक समय के निकट है? – रीवा
    • संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है – उज्जैन में
    • गिर के शेरों को रखे जाने हेतु किस राष्ट्रीय पार्क अभयारण का चयन किया गया? – पालपुर कूनो
  • मध्य प्रदेश में पंचायती राज

    इस लेख में मध्य प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था को संक्षिप्त में विश्लेषित किया गया है।

    मध्य प्रदेश में पंचायती राज

    1 नवम्बर, 1956 के पूर्व म.प्र. की तीन इकाइयों, यथा-मध्य भारत, विन्ध्य प्रदेश व महाकौशल में अलग-अलग पंचायती राज व्यवस्था कायम थी। राज्य बनने के बाद इस व्यवस्था का एकीकरण भी जरूरी हो गया था, जिसके लिए वर्ष 1962 में प्रथम बार म.प्र. पंचायत अधिनियम लागू किया गया। इसके अंतर्गत 1965 में चुनाव भी सम्पन्न कराए गए परन्तु जनपद पंचायत का चुनाव अधिनियम लागू किया गया। इसके अंतर्गत 1965 में चुनाव भी सम्पन कराए गए परन्तु जनपद पंचायत का चुनाव पहली बार 1971 में हो सका। वर्ष 1981 में प्रदेश सरकार द्वारा म.प्र. पंचायती राज अधिनियम के रूप में स्वीकृत हुआ। इसके अंतर्गत राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था जारी रखने की बात स्वीकार की गई। संविधान के 73वें संशोधन के अनुसार पुनः 29 दिसम्बर, 1993 को राज्य विधानसभा में म.प्र. पंचायती राज अधिनियम विधेयक प्रस्तुत किया गया जिसे विधानसभा द्वारा 30 दिसम्बर, 1993 को पारित कर दिया गया। तत्पश्चात् पंचायतों व नगरीय प्रशासन का चुनाव सम्पन कराने के लिए 19 जनवरी, 1994 को म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया गया। म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग के प्रथम आयुक्त श्री एन.वी. लोहानी थे। इस निर्वाचन आयोग के द्वारा 15 अप्रैल, 1994 को पंचायतों के चुनाव संबंधी अधिसूचना जारी कर दी गई। इस प्रकार इस राज्य ने देश में नई संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगर प्रशासनों के चुनाव कराने वाला देश में प्रथम राज्य होने का गौरव प्राप्त किया।

    त्रिस्तरीय पंचायत
    वर्तमान समय में राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था कायम है, जिनकी अवधारणा में एक या एक से अधिक गांवों के लिए  जिला पंचायतों की बात शामिल है। 1993 के अधिनियम में संविधान में त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रमुखों के निर्वाचन की स्थिति के संदर्भ में यह व्यवस्था की गई है  केवल ग्राम पंचायतों के सरपंच के मामले में निर्वाचन प्रक्रिया का जिम्मा राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा जबकि जनपद एवं जिला पंचायतों के मामले में सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के माध्यम से चुने हुए सदस्यों द्वारा किया जाएगा।

  • Rivers of Madhya Pradesh – (Part-1)

    मध्य प्रदेश की प्रमुख नदियाँ (भाग – 1)

    नर्मदा नदी

    नर्मदा नदी देश की पांचवी बड़ी नदी है नर्मदा नदी उदगम स्थल अनूपपुर के अमरकंटक में है| एवं समापन गुजरात के खंभात की खाड़ी में होता है | मध्य प्रदेश की गंगा के नाम से प्रसिद्ध इस नदी की लंबाई 1312 किलोमीटर है, यह नदी प्रदेश के 15 जिलों से गुजरती है अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, होशंगाबाद, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार एवं अलीराजपुर| मध्य प्रदेश में इसका बहाव 1077 कि. मी. है |

    नर्मदा नदी की कुल 42 सहायक नदियां है जिनमे से 22 बाएं तथा 19 नदियां दाएं से है |

    परियोजना

    • रानी अवंती बाई सागर बरगी परियोजना ( जबलपुर, बिजोरा )
    • सरदार सरोवर योजना (गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र संयुक्त)
    • 29 बड़ी 135 मध्यम व 3000 छोटी योजनाएं (निर्माणाधीन)
    • इंदिरा गांधी नर्मदा सागर परियोजना – खंडवा (पुनासा)

    दर्शनीय स्थल – कपिलधारा, दुग्ध धारा, सहस्त्र धारा, व संगमरमर के बीच से बहती हुई विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट जलप्रपात बनाती है|

    नर्मदा नदी के किनारे बसे प्रमुख शहर – होशंगाबाद, जबलपुर, माहेश्वर, ओमकारेश्वर व बुधनी

    चंबल नदी

    चंबल नदी का स्थान मध्य प्रदेश में महत्वपूर्ण है| महाभारत में वर्णित है कि राजा रति देव ने इसे उदगमित किया था | महू (इंदौर) के जानापाव पहाड़ी से इसका उदगम हुआ व इटावा में यमुना नदी में जाकर मिल जाती है | चम्बल नदी की मुख्य सहायक नदिया है – क्षिप्रा, कालीसिंध, पार्वती, बनास और बहाव उत्तर -पूर्व की ओर |यह नदी राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच सीमा रेखा बनाती है, नदी के जल द्वारा अवनालिका अपरदन से भिंड- मुरैना के निकट गहरी खाइयां है |

    परियोजना

    • गांधी सागर बांध जल विद्युत परियोजना मंदसौर
    • जवाहर सागर (कोटा राजसरहं ) राणा प्रताप सागर(चितौड़गढ़, राजस्थान ) जल विद्युत केंद्र
    • चंबल परियोजना राजस्थान व मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है
    • चंबल श्योपुर नहर से भिंड, मुरैना, ग्वालियर, मंदसौर व नीमच जिलों में सिंचाई होती है|

    बेतवा नदी

    रायसेन के कुमरा ग्राम से उदगमित बेतवा नदी उत्तर प्रदेश में यमुना में जाकर मिलती है| यह नदी उत्तर प्रदेश – मध्य प्रदेश की सीमा बनाती है इसकी 840 किमी है | बेतवा के किनारे बसे शहर हैं ओरछा सांची और विदिशा|

    सहायक नदियां – धसान, बेस, बीना, जामिनी|

    परियोजना

    • माताटीला बांध (महारानी लक्ष्मीबाई सागर)
    • भांडेर नहर (दतिया, ग्वालियर, भिंड लाभान्वित)
    • हलाली नहर (विदिशा, रायसेन)

    सोन नदी

    अन्य नाम- शोण, स्वर्ण, शोनभद्र

    सोन नदी अनूपपुर अमरकंटक से उदगमित होती है एवं पटना के निकट गंगा में समाहित होती है | इसकी लम्बाई 780 की. मी. है, यह मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश होती हुई बिहार तक बहती है |

    सहायक नदियां – जोहिला, बनास, गोपद, रिहन्द |

    परियोजना

    • बाणसागर (मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार संयुक्त) प्रमुख बांध देवलोद (शहडोल) में बनाया गया है|
    • बाणभट्ट सोन तट पर है

    क्षिप्रा नदी

    क्षिप्रा नदी इंदौर ककरी बरडी पहाड़ी से निकलकर उज्जैन, रतलाम, मंदसौर से बहती हुई चंबल में मिल जाती है इसकी लंबाई 195 किलोमीटर है| इसके किनारे पर बसा हुआ उज्जैन प्रमुख शहर है | इस शहर में सिंहस्थ कुम्भ का आयोजन होता है | समुद्र मंथन के बाद 14 रत्नों का बंटवारा क्षिप्रा (उज्जैन ) में हुआ था|

    सहायक नदियां – खान, गंभीर

    ताप्ती नदी

    सूर्य पुत्री ताप्ती नदी का उद्गम स्थल बैतूल जिले के मुलताई में है यह नदी नर्मदा के समानांतर बहती हुई मध्य प्रदेश की दक्षिणी सीमा निर्धारित करती हुई सूरत के निकट खंभात की खाड़ी में गिरती है| यह 724 किलोमीटर लंबी नदी है | यह मध्यप्रदेश एवं गुजरात की प्रमुख नदियों में से एक है इसके किनारे बसे हुए प्रमुख शहरों में बुरहानपुर व सूरत है|

    परियोजनाएं – काकरापारा और उकाई परियोजना गुजरात

    सहायक नदिया – पूर्णा, बाघुड़, गिरना, बोरी, शिवा

  • Soil of Madhya Pradesh

    Soil of Madhya Pradesh (General Knowledge)

    मृदा – मध्य प्रदेश में सबसे अधिक (43.4%) भूभाग पर जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है और अन्य मिट्टियों में काली मिट्टी लाल मिट्टी और लैटराइट मिट्टी पायी जाती है|

    मध्य प्रदेश में मिट्टियाँ – मध्यप्रदेश में मुख्यतः पांच प्रकार की मिट्टियां क्रमशः काली मृदा, जलोढ़ मृदा, लाल पीली मृदा, लेटराइट मृदा एवं मिश्रित लाल मृदा पाई जाती है| मध्य प्रदेश के उत्तर -पश्चिमी भाग में जलोढ़ मृदा, पश्चिमी भाग में काली मृदा, उत्तर -पूर्वी व दक्षिण भाग में मिश्रित लाल व काली मृदा दक्षिण -पूर्वी भाग में लाल- पीली मृदा का विस्तार पाया जाता है|

    मध्यप्रदेश में काली मिट्टी

    मध्यप्रदेश में सर्वाधिक काली मिट्टी का विस्तार पाया जाता है जो राज्य के लगभग 43.44% भू -भाग पर पाई जाती है| काली मिट्टी में मुख्य रूप से सोयाबीन, मूंगफली, कपास आदि फसलों की खेती की जाती है|

    काली मिट्टी की उपलब्धता मालवा के पठार दक्षिणी भाग में स्थित नर्मदा घाटी के अंतर्गत होशंगाबाद, रायसेन, हरदा, नरसिंहपुर, सागर, दमोह तथा दक्षिण- पूर्वी व दक्षिणी -पश्चिमी भाग में सतपुड़ा घाटी क्षेत्र के अंतर्गत खंडवा, खरगोन, छिंदवाड़ा, सिवनी व बैतूल जिले में पाया जाता है|

    मध्यप्रदेश में जलोढ़ मिट्टी

    मध्य प्रदेश की सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी जलोढ़ मिट्टी है| यह मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में बुंदेलखंड नीस तथा चंबल एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा निक्षेपित पदार्थ से निर्मित जलोढ़ मिट्टी का विस्तार मुख्यतः भिंड, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी जिले के लगभग 3.35 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में उपलब्ध है, जो संपूर्ण राज्य के कुल क्षेत्रफल का 7.57% है|

    जलोढ़ मिट्टी बहते हुए जल द्वारा बहा कर लाया तथा कहीं अन्यत्र जमा किया गया अवसाद होता है| यह मृदा भुरभुरी होती है अर्थात इसके कारण आपस में सख्ती से बंधकर कोई ‘ठोस’ शैल नहीं बनाते|

    मध्य प्रदेश के उत्तर व उत्तर -पश्चिमी भाग में गंगा की सीमांत घाटी (गंगा यमुना मैदानी क्षेत्र )अर्थात चंबल घाटी व उसके निकटवर्ती क्षेत्रों में चंबल नदी द्वारा बहा कर लाए गए अवसादों से कछारों का निर्माण होता है इसलिए जलोढ़ मृदा को कछारी विदा कहा जाता है| इसके अतिरिक्त खाद्यान्न उत्पादन की दृष्टि से सबसे उपयोगी व महत्वपूर्ण मिट्टी होने के कारण जलोढ़ मिट्टी को खाद्यान्न मिट्टी कहा जाता है तथा इसे दोमट मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है|

    लाल पीली मिट्टी

    मध्य प्रदेश के दक्षिणी भाग में स्थित बालाघाट जिले के अंतर्गत लाल -पीली मिट्टी का विस्तार पाया जाता है, जो धान की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मृदा है | बालाघाट जिले के अतिरिक्त डिंडोरी, मंडला आदि जिलों में भी लाल -पीली मृदा पाई जाती है|

    लैटेराइट मिट्टी

    मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा बालाघाट व बैतूल जिले में लैटेराइट मिट्टी का अधिकांश भाग विस्तृत है| लेटराइट मृदा को लाल बलुई मृदा तथा स्थानीय स्तर पर भाटा भी कहा जाता है| लैटेराइट मिट्टी का विस्तार अधिकांशत: उन क्षेत्रों में पाया जाता है, जहां वर्षा अधिक मात्रा में होती है मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में भैंसदेही पठार के अंतर्गत लैटेराइट मृदा का विस्तार पाया जाता है, जिसमें कॉफी (कहवा ) की खेती की जाती है|

    मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के भैंसदेही तहसील के अंतर्गत कुकरु ग्राम में लगभग 110 हेक्टेयर क्षेत्र में कॉफी का उत्पादन होता है, इस क्षेत्र में कॉफी उत्पादन प्रारंभ करने का श्रेय ब्रिटिश नागरिक सैंट विल्फोर्ड को प्रदान किया जाता है |

    मिश्रित मृदा

    मध्य प्रदेश के बघेलखंड व बुंदेलखंड क्षेत्र में लाल- पीली मिट्टी तथा काली मिट्टी के मिश्रित रूप का विस्तार पाया जाता है| मिश्रित मृदा का विस्तार प्रमुख रूप से रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, शिवपुरी, गुना आदि जिलों में पाया जाता है इस जिसमें प्रमुख रुप से ज्वार, बाजरा व अन्य मोटे अनाजों की खेती की जाती है|

    मध्यप्रदेश में मृदा अपरदन

    मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में मध्य भारत पठार के अंतर्गत चंबल तथा उसकी सहायक नदियां अपने दोनों किनारों पर अत्यधिक गहरे गड्ढों (उत्खात भूमि )का निर्माण करती है, जो इस क्षेत्र में गहरी नालियां अवनालिका अपरदन का विकराल रूप धारण कर नाली कटाव के रूप में जलोढ़ मृदा क अपरदन करता है | मृदा अपरदन अर्थात मिट्टी केअवक्षरण को रेंगती हुई मृत्यु भी कहा जाता है|

    मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित मुरैना जिला सर्वाधिक अपरदन की समस्या से ग्रस्त है| मुरैना जिले के अतिरिक्त भिंड, श्योपुर व ग्वालियर जिलों में चंबल, सीप, बेसली, कूनो, पार्वती, सांक एवं सिंध नदी द्वारा भी बीहड़ क्षेत्र का निर्माण हुआ है|

    मृदा अपरदन रोकने हेतु प्रयास

    वर्ष 2018 में भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में चंबल क्षेत्र को “ग्रीन एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट ” में सम्मिलित कर बीहड़ समस्या के निदान व उन्मूलन के प्रयास किए जा रहे हैं|मध्य प्रदेश की उत्पाद भूमि के अवनालिका अपरदन का परिणाम है कि मध्य प्रदेश की चंबल नदी द्वारा बनाए गए बड़े-बड़े खड्डे एवं चंबल की सहायक नदियों के किनारों पर एक चौड़ी पेटी अत्यधिक गहरे गड्ढे में परिवर्तित हो गई है। लगभग 6.5 लाख एकड़ बहुमूल्य कृषि भूमि का इन खड्डों में परिवर्तित हो जाना ही अवनालिका अपरदन का विकराल रूप है | मध्य प्रदेश के भिंड एवं मुरैना जिले अवनालिका अपरदन से सर्वाधिक रूप से प्रभावित है|

  • Madhya Pradesh – Important Crops (Part-I)

    मध्यप्रदेश – प्रमुख फसल (सामान्य ज्ञान)

    कृषि के अंतर्गत फसल वर्गीकरण में मक्का को अनाज में, सरसों को तिलहन में, चना को दलहन में, तथा मटर को सब्जियों में सम्मिलित किया जाता है|

    • अनाज – गेहूं, ज्वार, मक्का, धान
    • तिलहन – सोयाबीन, सरसों, अलसी
    • दलहन – चना, तुवर, मसूर
    • सब्जियां – हरी मटर, फूलगोभी, भिंडी, टमाटर, आलू, प्याज
    • फल – आम, अमरूद, केला, संतरा, पपीता
    • मसाले – मिर्च, लहसुन, हल्दी, अदरक, धनिया

    मध्य प्रदेश के कृषि जलवायु क्षेत्र

    भौगोलिक व जलवायु भिन्न-भिन्न होने के कारण मध्य प्रदेश को विशिष्ट कृषि जलवायु क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है |राज्य के 09 कृषि जलवायु क्षेत्र व 5 फसल क्षेत्र है |

    जलोढ़ मृदा एवं 80 से 100 सेंटीमीटर औसत वर्षा वाले क्षेत्र में राज्य के ग्वालियर, भिंड, मुरैना, अशोक नगर एवं शिवपुरी जिले सम्मिलित है यह कृषि जलवायु क्षेत्र तिलहन के लिए प्रसिद्ध है साथ ही शिवपुरी जिले में मूंगफली का उत्पादन सर्वाधिक होता है | इस कृषि क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला बीनगंज क्षेत्र धनिया उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है|

    कृषि जलवायु क्षेत्र और फसल

    1. कैमूर का पठार और सतपुड़ा की पहाड़ी – गेहूं, धान
    2. मध्य नर्मदा घाटी – गेहूं
    3. विंध्य का पठार – गेहूं
    4. मध्य क्षेत्र – गेहूं, ज्वार
    5. बुंदेलखंड – गेहूं, ज्वार
    6. सतपुड़ा का पठार – गेहूं, ज्वार
    7. मालवा का पठार – कपास, ज्वार
    8. निमाड़ का मैदान – कपास, ज्वार
    9. झाबुआ की पहाड़ी – कपास

    मध्य प्रदेश के फसल क्षेत्र

    • कपास /ज्वार – मध्यप्रदेश का पश्चिमी, उत्तर पश्चिमी तथा दक्षिण पश्चिमी क्षेत्र
    • गेहूं /ज्वार – संपूर्ण मध्यप्रदेश, किंतु उत्तरी भाग में अत्यधिक उत्पादन
    • धान क्षेत्र – मध्य प्रदेश का पूर्वी व दक्षिणी – पूर्वी क्षेत्र
    • गेहूं क्षेत्र – मध्य प्रदेश का मध्य भाग व मालवा क्षेत्र
    • गेहूं/धान क्षेत्र – मध्य प्रदेश का पूर्वी भाग

    रबी एवं खरीफ फसले

    खरीफ की फसल को बुवाई के समय अधिक गर्मी और नमी की आवश्यकता होती है और शुष्क वातावरण में फसल पकती है इसलिए जून-जुलाई में फसल बोई जाती है और अक्टूबर महीने में काटी जाती है | इसकी प्रमुख फसल है धान इसके अलावा ज्वार, बाजरा, मक्का, गन्ना, मूंगफली, कपास, सोयाबीन, जूट इत्यादि है|

    रबी इस फसल की बुआई के समय कब कम तापमान की आवश्यकता होती है और पकते समय शुष्क और गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है इसलिए अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में काटी जाती है| इसकी मुख्य फसल गेहूं है | इसके अलावा सरसों, जौ, मटर, राई आलू, चना इत्यादि हैं|

    जायद फसल – मार्च और जून के बीच उगाई जाने वाली फसलें गर्मी की फसलें होती है, जिन्हें जायद’ नाम से जाना जाता है |

    खरीफ की फसल मध्य प्रदेश के 67% तथा रबी की फसलें मध्य प्रदेश के 33% भाग में उगाई जाती है| मध्य प्रदेश की मुख्य खाद्यान्न फसल गेहूं है जिसमें उत्पादन के लिए मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड भी मिला है भारत में उत्तर प्रदेश के पश्चात गेहूं उत्पादन में मध्यप्रदेश का द्वितीय स्थान है गेहूं की कृषि के लिए हल्की दोमट मृदा 10 से 15°C तापमान तथा लगभग 75°C सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है| मध्य प्रदेश में अशोक नगर गेहूं उत्पादन में प्रथम स्थान पर है जबकि इसके बाद क्रमशः श्योपुर एवं ग्वालियर का स्थान आता है |

    • वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश के खमरिया जबलपुर में गेहूं और मक्का के क्षेत्र में शोध एवं विकास के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय गेहूं और मक्का शोध केंद्र ‘की स्थापना की गई है|
    • मध्यप्रदेश में गेहूं अनुसंधान केंद्र होशंगाबाद के पावर खेड़ा में स्थित है मध्य प्रदेश की मुख्य खाद्यान्न फसल गेहूं है, जिसके उत्पादन के लिए मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड भी दिया गया है| मध्यप्रदेश देश का लगभग 18.2% गेहूं उत्पादन करता है |
    • मालवा के पठार को गेहूं की डलिया भी कहा जाता है|
    • मध्यप्रदेश में हरित क्रांति का सर्वाधिक प्रभाव गेहूं और चावल की कृषि के विकास में हो रहा है|
    • मध्यप्रदेश में मक्का का कृषि क्षेत्रफल वर्ग 1262 हेक्टेयर हो गया है | प्रदेश में धार जिला मक्का उत्पादन में प्रथम है|

  • Madhya Pradesh – Agriculture (General Knowledge)

    मध्यप्रदेश – कृषि (सामान्य ज्ञान)

    कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को अर्थव्यवस्था के प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत सम्मिलित किया जाता है मध्य प्रदेश की 72.37% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, जिनकी आजीविका का प्रधान साधन कृषि है। मध्यप्रदेश में कृषि आजीविका का मुख्य साधन है तथा यह अत्यधिक वर्षा पर निर्भर है।

    मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र के तथ्य

    • मधय प्रदेश में कुल कार्यशील जनसंख्या – 2.57 करोड़
    • मधय प्रदेश में कुल कृषक जनसंख्या – 1.10 करोड़
    • मध्य प्रदेश में कुल खेतिहर मज़दूर – 74 लाख
    • मध्य प्रदेश का कुल क्षेत्रफल – 3.08 करोड़ वर्ग हेक्टेयर
    • मध्य प्रदेश में प्रति व्यक्ति खाद्यान्न उत्पादन – 249.20 किलो

    कार्यशील जनसँख्या

    2011 के जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल श्रमिकों की संख्या लगभग तीन करोड़ 15 लाख है, जिसमें कृषकों का प्रतिशत 31.2% है। आंकड़ों के अनुसार राज्य में कृषि पर निर्भरता (ग्रामीण एवं शहरी) वर्ष 2001 की तुलना में वर्ष 2011 में घटी है जबकि केवल ग्रामीण क्षेत्र में कृषि पर निर्भरता वर्ष 2001 में 85.5% की तुलना में वर्ष 2011 में 85.6% की मामूली परिवर्तन के साथ बढ़त हुई है ।

    • कृषि पर कुल निर्भरता – 69.8%
    • कृषको कि संख्या – 31. 2%
    • कृषि श्रमिकों कि संख्या – 38. 6%
    • कृषि पर ग्रामीण निर्भरता – 85. 6%
    • कृषि पर कुल निर्भरता – 69.8%

    मध्प्रदेश में कृषि भू जोतों का आकार 1.78 हेक्टेयर है । मध्प्रदेश में कुल कृषि क्षेत्रफल निम्नानुसार है-

    • अनाज – 41%
    • तिलहन – 29%
    • दलहन – 21%
    • उद्यानिकी – 6%
    • वाणिज्यिक – 3%

    भूमि उपयोग का प्रतिरूप मृदा, जलवायु , स्थलाकृति प्रौद्योगिकी, जलवायु का सामूहिक प्रतिफल है।

    कृषि संबंधी संस्थान

    • म.प्र. कृषि अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान – भोपाल
    • कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय – जबलपुर
    • प्रदेश का चावल अनुसंधान केंद्र – बड़वानी
    • उद्यानिकी महाविद्यालय – मंदसौर

    कृषि आर्थिक सर्वेक्षण

    आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार विगत 2 सालों में प्रदेश में दलहनों को छोड़कर सभी अनाज और दलहन का रकबा घटा है सबसे अधिक तिलहन का उत्पादन 15% तक घटा है। उड़द और चने के उत्पादन में बढ़ोतरी होने से दलहनों का कुल उत्पादन साल दर साल के आधार पर 15.35% बढ़ा है ।

    मध्यप्रदेश में जैविक खेती

    जैविक कृषि को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सरकार ने मंडला जिले में 47 हेक्टेयर भूमि जैविक कृषि के लिए प्रदान की है इसमें जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जबलपुर )द्वारा जैविक कृषि अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया है । मध्यप्रदेश में सर्वाधिक जैविक कृषि की जाती है । 2.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल जैविक खेती होती है ।

    “फार्म टू फॉर्क” (Farm to Fork) मध्य प्रदेश की राज्य जैविक नीति का दृष्टिकोण है। मध्य प्रदेश जैविक खेती को बढ़ावा देने वाला देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश के वर्ष, 2011 में अपनी जैविक कृषि नीति बनाई । जिसका दृष्टिकोण ‘ फार्म टू फॉक ‘ है । प्रदेश में सर्वप्रथम 2001-02 में जैविक खेती का आंदोलन चलाकर प्रत्येक विकासखंड के एक गांव में जैविक खेती प्रारंभ की गई है, और इन गांव को “जैविक गांव ” का नाम दिया गया है।

  • Climate of Madhya Pradesh (General Knowledge)

    मध्य प्रदेश की जलवायु (Important points)

    • मध्यप्रदेश उपोष्ण कटिबंधीय (sub-tropical) जलवायु क्षेत्र में स्थित है तथा यहां उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पाई जाती है मध्य प्रदेश के पश्चिम और उत्तर पश्चिम भाग में अर्ध शुष्क (semi-arid), उत्तरी भाग में उप आद्र (sub-humid) तथा दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र में आद्र (humid) जलवायु पाई जाती है तापमान की दृष्टि से मध्य प्रदेश का अधिकांश भाग अति तापीय (megathermal) वर्ग में आता है|
    • मध्यप्रदेश में 21° सेल्सियस की समताप रेखा (isothermal line ) राज्य को उत्तरी एवं दक्षिणी दो भागों में विभाजित करती है, जिसके कारण उत्तरी भाग का तापमान अधिक जबकि दक्षिणी भाग का तापमान कम रहता है | मध्य प्रदेश में 21 मार्च के बाद सूर्य उत्तर की तरफ प्रस्थान करने लगता है जिसके कारण तापमान में वृद्धि होती है तथा 21 जून को कर्क रेखा के निकट सूर्य लंबवत होता है, मध्यप्रदेश में ग्रीष्म ऋतु के आरंभिक काल के दौरान दक्षिणी भागों की समुद्र से निकटता और सूर्य के लंबवत होने के फलस्वरूप औसत तापमान अपेक्षाकृत अधिक तथा उत्तर पश्चिमी भाग में कम हो जाता है| इस अवधि में समताप रेखाएं अधिकांश पर पूर्व से पश्चिम कि ओर स्थान्तरित हो जाती है किंतु मई-जून में मध्यप्रदेश के मध्यवर्ती व उत्तरी भाग में सूर्य लंबवत होने के कारण औसत तापमान अधिक हो जाता है तथा दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व की ओर कम हो जाता है|
    • मध्य प्रदेश की जलवायु उष्ण कटिबंधीय स्वरूप प्रदान करने का श्रेय कर्क रेखा को जाता है, जो मध्य प्रदेश के मध्य भाग में स्थित 14 जिलों क्रमशः रतलाम, उज्जैन, आगरमालवा, राजगढ़, सीहोर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, दमोह, कटनी, जबलपुर, उमरिया तथा शहडोल से होकर गुजरती है|

    मध्य प्रदेश में जलवायविक वर्गीकरण

    • कोपेन के अनुसार मध्य प्रदेश की जलवायु को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है| मध्य प्रदेश के दक्षिण पश्चिम व पश्चिम में स्थित बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, अलीराजपुर, धार तथा झाबुआ आदि जिलों में उष्णकटिबंधीय सवाना जलवायु (Aw) एवं राज्य के शेष अन्य भागों में शुष्क शीत मानसूनी जलवायु (Cwg) पाई जाती है|
    • ए. आर. सुब्रमण्यम तथा टी. श्री मन्नारायण (1991) ने मध्य प्रदेश की जलवायविक अध्ययन तापमान और वर्षा के वितरण को आधार मानकर मध्य प्रदेश की जलवायु को तीन भागों क्रमशः आद्र-शुष्क अथवा स्टेपी गर्म शीतोष्ण वर्षा जलवायु तथा उष्णकटिबंधीय आद्र एवं शुष्क जलवायु में वर्गीकृत किया गया है|
    • जलवायु के आधार पर मध्य प्रदेश को चार भागों में विभाजित किया गया है:- उत्तर का मैदान, मालवा का पठार, विंध्य पर्वतीय क्षेत्र, नर्मदा सोन घाटी |

    मध्यप्रदेश कि जलवायु सम्बन्धी मुख्य तथ्य

    • मध्यप्रदेश में न्यूनतम वर्षा – गोहद (भिंड)
    • मध्यप्रदेश में सर्वाधिक ठंड – शिवपुरी व मुरैना
    • मध्यप्रदेश में सर्वाधिक वर्षा – पचमढ़ी होशंगाबाद
    • मध्यप्रदेश में सर्वाधिक गर्मी – गंज बासौदा विदिशा

    मध्य प्रदेश में वर्षा का वितरण

    • मध्य प्रदेश के दक्षिण व दक्षिण – पूर्वी भाग में स्थित बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी तथा अनूपपुर जिलों में वार्षिक वर्षा 125 से 150 सेमी. के मध्य होती है |
    • मध्यप्रदेश के मध्यवर्ती तथा उत्तर -पूर्वी भाग में स्थित रायसेन, सागर, दमोह, भोपाल, विदिशा, सीधी तथा छतरपुर जिले में वार्षिक वर्षा 75 से 100 सेमी. के मध्य होती है |
    • मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिम व उत्तरी भाग में स्थित इंदौर धार, उज्जैन, रतलाम, दतिया, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, अलीराजपुर, सीहोर तथा शाहजहांपुर आदि जिलों में औसत वार्षिक वर्षा 75 सेमी से कम होती है |
    • मध्य प्रदेश मानसूनी जलवायु वाला प्रदेश है | यहां पर पायी जाने वाली ऋतु में तापमान की विभिन्नता रहती है | प्रदेश में सर्वाधिक तापमान मई माह में तथा सबसे कम जनवरी में होता है, लेकिन सर्वाधिक दैनिक तापांतर (दिन रात के तापमान का अंतर )मार्च माह में पाया जाता है |
    • मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, शिवपुरी आदि जिले निम्न वर्षा वाले क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं रीवा, सतना, सीधी औसत से कम वर्षा वाले तथा बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा जिले औसत से अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में आते हैं |

    मध्यप्रदेश में उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पायी जाती है तथा शीत ऋतु को सियाला, ग्रीष्म ऋतु को युनाला एवं वर्षा को चौमासा के नाम से जाना जाता है | सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के अंतर्गत स्थित पचमढ़ी(होशंगाबाद) को सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान होने के कारण मध्य प्रदेश का चेरापूंजी कहा जाता है| मध्य प्रदेश में पूर्व से पश्चिम की ओर एवं दक्षिण से उत्तर की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा क्रमशः घटती जाती है|

  • Tribes of Madhya Pradesh

    ट्राइब्स ऑफ़ मध्यप्रदेश (सामान्य ज्ञान)

    • मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति आयोग का गठन वर्ष 1995 में किया गया था |
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत, प्रदेश में अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण तथा अनुसूचित जातियों के हितों कि रक्षा के लिए सुझाव देने हेतु मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति सलाहकार मंडल का गठन किया गया है |इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री एवं उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के मंत्री होते है |अनुसूचित जाति सलाहकार मंडल में 25 सदस्य होते है |
    • मध्य प्रदेश में जनजाति संग्रहालय भोपाल में स्थित है|
    • मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम की स्थापना कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 के अंतर्गत 29 सितंबर, 1994 को की गई इसका उद्देश्य जनजातीय समाज का आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास करना है|
    • मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद की स्थापना वर्ष 1981 में की गई थी, जिसका उद्देश्य जनजातीय वर्ग के शिक्षित बेरोजगारों युवाओं के लिए तकनीकी एवं व्यवहारिक क्षेत्र में कुशलता का विकास कर उनके आर्थिक अवसरों में वृद्धि करना है |
    • वर्ष 1980 में वन्या प्रकाशन की स्थापना अनुसूचित जनजाति, आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के संयुक्त उपक्रम के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य प्रदेश की आदिवासी संस्कृति से संबंधित श्रेष्ठ साहित्य को आदिवासी समाज तक पहुंचाना है|
    • 20 मार्च, 1980 में उद्यमी विकास संस्थान की स्थापना की गई थी| इसका उद्देश्य अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति तथा आर्थिक रूप से पिछड़े हुए व्यक्तियों को उद्योग स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण तथा आर्थिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान करना है|
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 में सूचीबद्ध जातियां अनुसूचित जातियां कहलाती है|
    • इस समय 47 से अधिक जातियां मध्य प्रदेश में है |
    • राज्य कि सबसे बड़ी अनुसूचित जाति जाटव है |
    • सर्वाधिक अनुसूचित जाति इंदौर जिले में है |
    • न्यूनतम अनुसूचित जाति झाबुआ जिले में है |
  • Madhya Pradesh-General Knowledge (Part-4)

    मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान (भाग-4)

    • अटल सागर परियोजना मध्य प्रदेश के जिला शिवपुरी में निर्मित है |
    • ग्वालियर जिले के खुरेरी तालाब पर राष्ट्रीय स्तर का प्रथम पक्षी पार्क स्थापित किया गया है|
    • प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित बांचा गांव में देश का पहला सौर्य ऊर्जा चलित चूल्हे पर खाना पकता है |
    • प्रदेश के सीहोर जिले की मेघा परमार ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह किया|
    • भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन पर आधारित देश का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय पार्क रायसेन जिले के सांची में है |
    • मध्य प्रदेश के बरवेट गांव के मधुसूदन पाटीदार ने बर्फ कि सबसे ऊंची पहाड़ी माउंट एल्ब्रस पर तिरंगा फहराया|
    • देश का प्रथम कौशल विकास विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश में स्थापित किया गया|
    • नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक (एनजेजीबी) देश का पहला मूक बधिर फ्रेंडली बैंक है|जो कि सांकेतिक भाषा का उपयोग करती है |
    • मध्य प्रदेश के इंदौर जिले को स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्रथम स्थान प्राप्त हुआ |
    • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में मध्य प्रदेश को चयनित किया गया |
  • Madhya Pradesh – Important Sportsperson (Part-1)

    मध्य प्रदेश के प्रमुख खिलाड़ी एवं सम्बंधित खेल स्पर्धाएं (भाग-1)

    हॉकी – शिवेंद्र सिंह, असलम शेर, शंकर लक्ष्मण, रूप सिंह, नीता डूमरे, मीर रंजन नेगी, ओलंपियन सैयद जलालुद्दीन, आर. ए. कृष्टि, मसूद ओलंपियन जलील अहमद नैनपुर, यसूद, शमसुदीन, शहाबुद्दीन, हसन खान, माइकल रोस्क्यू, समीर दाद |

    क्रिकेट – ईश्वर पांडे, मोहनीश मिश्रा, ऋषिकेश कानिटकर, सी के नायडू, मेजर जगदाले, मुस्ताक अली, चंदू सरवटे, अशोक जगदाले, कीर्ति पटेल, राजेश्वरी ढोलकिया, भगवान दास, अमिताभ विजयवर्गीय, नरेंद्र हिरवानी, सोहेल अंसारी, महमूद हसन, नमन ओझा, अजितेश अर्गल, श्वेता मिश्रा, अमय खुरासिया, जे पी यादव |

    फुटबॉल – एंब्रोस नीमच, हफिज अहीर, तरसेम माइकल नाथ, डी. सेनापति (महू), प्रहलाद, राजू सैनी, ताराचंद्र, नेमीचंद नरेश, यदु, मानसिंह तेलंग, गुरु प्रसाद शर्मा, राजा महेंद्र बहादुर|

    टेबल टेनिस – जाल गोदरेज (इंदौर), रीता जैन, पूजा शर्मा, नेहा मेहता, कर्म मणीक, पंकज घाघरिया, पंकज सत्यपथी, ज्योति मेहता, रिंकू आचार्य|

    शतरंज – रफीक खान, किरण अग्रवाल, एन सुधाकर बाबू, एम. चंद्रशेखर|