Category: MPPSC 2021

  • Madhya Pradesh – Mineral Resources (Part I in Hindi)

    मध्यप्रदेश में खनिज संसाधन (भाग-1)

    (1) मध्यप्रदेश खनिज संसाधनों की दृष्टि से सम्पन्न राज्य है ।

    (2) अविभाजित मध्यप्रदेश का खनिज उत्पादन में प्रथम स्थान था ।

    (3) मध्यप्रदेश का खनिज भण्डारों की दृष्टि से देश में तीसरा स्थान है ।

    (4) मध्यप्रदेश में लगभग 25 प्रकार के खनिज पाये जाते हैं, जिनमें से 20 का उत्पादन प्रदेश में किया जा रहा है।

    (5) मध्यप्रदेश ने अपनी खनिज नीति सर्वप्रथम वर्ष 1995 में घोषित की।

    (6) मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम की स्थापना 19 जनवरी, 1962 में की गई।

    म.प्र. में पाये जाने वाले विशिष्ट पत्थर

    1. सागर जिले के सोप स्टोन से बनता है टेल्कम पावडर- कई लोग कॉस्मेटिक उत्पाद के रूप में टेलकम पाउडर का उपयोग करते हैं। सागर, टीकमगढ़, छतरपुर जिले में पाए जाने वाले सोप स्टोन से टेलकम पावडर बनाया जाता है। यह काफी चिकना होता है। इसका इस्तेमाल पेस्टिसाइड और हैंडीक्राफ्ट वस्तुएँ बनाने में भी होता है।

    2. बड़वानी के पत्थर से बनती है कैल्शियम की गोलियां- बड़वानी जिले में पाए जाने वाले कैलसाइट खनिज का उपयोग मेडिसिन तैयार करने में किया जाता है । कैल्शियम की गोलियां इस पत्थर से ही तैयार की जाती है । इसका उपयोग मृदा उपचार में किया जाता है। बड़वानी में इसकी खदाने स्वीकृत थी, लेकिन वर्तमान में ये बंद है।

    3. टीकमगढ़ के पत्थर से बनाया जाता है पेस्टिसाइड- टीकमगढ़ में पाए जाने वाले पायरोफिलाइट खनिज में फास्फोरस पाया जाता है। इस वजह से इसे पीसकर इसमें केमिकल मिलाया जाता है। इस पत्थर का गुण यह होता है कि यह केमिकल सोख लेता है। इस वजह से इसका कीटनाशक तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है।

    4. कटनी के सेंड स्टोन से बनाई जा रही मूर्ति व आकृतियाँ- अभी तक राजस्थान में पत्थरों से मूर्तियां बनाई जाती थीं, लेकिन अब प्रदेश में कटनी जिले के रीठी गाँव में पाया जाने वाले खास तरह के सेंड स्टोन से मूर्तियां व कलाकृति तैयार की जा रही है।

  • Brief note on Shadow Cabinet

    The shadow cabinet or shadow ministry is a feature of the Westminster system of government. It consists of a senior group of opposition spokespeople who, under the leadership of the Leader of the Opposition, form an alternative cabinet to that of the government, and whose members shadow or mirror the positions of each individual member of the Cabinet. Members of a shadow cabinet have no executive power. It is the shadow cabinet’s responsibility to scrutinise the policies and actions of the government, as well as to offer alternative policies. The shadow cabinet makes up the majority of the Official Opposition Frontbench. In most countries, a member of the shadow cabinet is referred to as a shadow minister. In the United Kingdom’s House of Lords and in New Zealand, the term spokesperson is used instead of shadow. In Canada, however, the term opposition critic is more common.

    The shadow minister’s duties may give them considerable prominence in the party caucus hierarchy especially if it is a high-profile portfolio. Although the salary and benefits paid from the public treasury to shadow ministers remain the same as for a backbencher, some opposition parties provide an additional stipend in addition to the salary they receive as legislators while many at least reimburse shadow ministers for any additional expenses incurred that are not otherwise eligible for reimbursement out of public funds. Moreover, in most Westminster- style legislative bodies all recognized parliamentary parties are granted a block of public funding to help their elected members carry out their duties, often in addition to the budgets individual legislators receive to pay for constituency offices and other such expenses. There is typically a stipulation that such funds must be used for official parliamentary business, however within that restriction parties can usually distribute the funds among their elected lawmakers as they see fit and rhereby provide the money needed to staff and support shadow ministries.

    One of the outstanding features of the British Parliamentary system is the shadow cabinet. The opposition party forms its own cabinet that would parallel that of the ruling party. They work under the Leader of Opposition and will have expert party workers or neutral members assisting them. Each cabinet minister and his team are matched with a shadow minister in the Opposition. Just as there would be unelected expert advisors in the cabinet minister’s team, the shadow minister also would have his own team. The shadow ministers neither have powers nor any extra payment, but they serve an important purpose. They get trained in governance while in the Opposition.

    Each minister will have an in-depth knowledge of the portfolio he/she may be handling when his/her party gets power. The debates in the Parliament or Legislative Assemblies will become more informed instead of the cacophony Indian elected Houses are notorious for. This would make the life of the ruling party difficult in an informed and civilised way. The crux of democracy is that no government, whatever be the size of majority in the Parliament, can get away with autocratic and arbitrary decisions at the whims of its leader. Every act will have to be debated in the Parliament or Legislative Assembly. It is the debate that informs the public about the various aspects of any law that is being enacted.

    Source: Wikipedia and The New Indian Express

  • Madhya Pradesh Railways (Part-I)

    मध्य प्रदेश रेलवे से सम्बन्धित सामान्य ज्ञान

    मध्यप्रदेश में रेलवे से सम्बन्धित संस्थान

    (1) वर्ष 1951 से पूर्व मालवा से गुजरने वाली रेलवे लाइनें दो स्वतंत्र प्राधिकरणों के अधीन आती थी – (1) राजपूताना मालवा रेलवे, इन्दौर से उज्जैन तक,(2) होलकर स्टेट रेलवे,इन्दौर से खण्डवा तक ।

    (2) मध्यप्रदेश में एकमात्र रेलवे जोन की स्थापना वर्ष 1998 में पश्चिम मध्य रेलवे’ के नाम से जबलपुर में हुई ।

    (3) रेलवे स्लीपर बनाने का कारखाना वनखेड़ी (बुधनी) में है, तथा नवीन स्लीपर कारखाना झाबुआ में प्रस्तावित है।

    (4) रेलवे भर्ती बोर्ड का मुख्यालय भोपाल में है।

    (5) रेलवे ट्रैक्शन (विद्युत इंजिन) भेल पिपलानी (भोपाल) में है।

    (6) रेल स्प्रिंग बनाने का कारखाना सिथौली (ग्वालियर) में है।

    (7) वैगन रिपेयर वर्कशॉप सतना में है।

    (8) डीजल लोकोमोटिव्ह कारखाना इन्दौर व विदिशा में है तथा तीसरा सीहोर के श्योपुर में निर्माणाधीन है।

    (9) इलेक्ट्रिक एवं डीजल लोको शेड-कटनी व इटारसी में है।

    (10) कोच रिपेयर वर्कशॉप भोपाल के निशातपुरा में है।

    (11) भारत के 17 रेलवे जोनों में एक मध्यप्रदेश में है।

    (12) मध्यप्रदेश में पश्चिम मध्य रेलवे जोन के नाम से जबलपुर में रेलवे जोन स्थापित किया गया।

    (13) प्रदेश के बुधनी (सीहोर) में रेल्वे स्लीपर बनाने का कारखाना है प्रदेश का सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन इटारसी में है।

    (14) मध्यप्रदेश में तीन रेलवे क्षेत्र मध्य रेलवे, पश्चिमी रेलवे तथा दक्षिण-पूर्वी रेलवे हैं।

    (15) मध्यप्रदेश के ग्वालियर, भोपाल, रीवा, जबलपुर में मध्य रेलवे द्वारा रेल परिवहन होता है।

    (16) पश्चिम रेलवे द्वारा प्रदेश के इंदौर, देवास, सीहोर, रतलाम, उज्जैन, मंदसौर में रेल परिवहन संचालित होता है।

    (17) दक्षिण-पूर्वी रेलवे द्वारा प्रदेश के शहडोल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी जिलों में परिवहन होता है।

    (18) प्रदेश में रेल सेवा आयोग तथा रेल सेवा विभाग का मुख्यालय भोपाल में है।

    (19) मध्यप्रदेश के भोपाल से दिल्ली चलने वाली भोपाल एक्सप्रेस 1.S.0-9001 प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाली देश की पहली ट्रेन है।

    (20) भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन को प्रमाण पत्र प्राप्त करने I.S.O-9001 का गौरव हासिल है।

    (21) मध्यप्रदेश से गुजरने वाले रेल मार्ग-
    (1) दिल्ली-आगरा-ग्वालियर-भोपाल-इटारसी-मुंबई
    (2) दिल्ली-रतलाम-नागदा-मुंबई
    (3) मुंबई-इटारसी-जबलपुर-कटनी-कोलकाता
    (4) मुंबई-इटारसी-जबलपुर-कटनी-इलाहाबाद
    (5) दिल्ली-मुंबई-बीना-भोपाल-इटारसी-हैदराबाद-चेन्नई

    (22) मध्यप्रदेश का पहला रेलमार्ग इलाहाबाद-जबलपुर सन् 1867 में खुला।

  • Atmanirbhar Bharat

    आत्मनिर्भर भारत योजना की शुरुआत -12 मई 2020

    योजना का नाम – आत्म निर्भर भारत अभियान योजना

    आत्म निर्भर भारत अभियान की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कोरोना वायरस की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए की थी| इस अभियान के द्वारा भारत में लोगों को कामकाज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और यह प्रयत्न किया जाएगा कि अगले कुछ सालों में भारत अपनी जरूरतों की अधिकतर वस्तुएं अपने देश में ही तैयार करें अर्थात आत्मनिर्भर बन जाए| इसका मुख्य उद्देश्य देश की आर्थिक स्थिति को सुधारना है जिससे कि देश की इकोनॉमी वापस पहले जैसी हो सके|

    आत्म निर्भर भारत बनने की जरुरत क्यों है – भारत प्राचीन काल से ही संसाधनों से परिपूर्ण देश रहा है|यहां हर प्रकार के चीजों को बनाने और उसका अपने जीवन में उपयोग कर अपने राष्ट्र निर्माण में मदद कर सकता है |समस्त विश्व में केवल भारत ही ऐसा देश है जहां प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं जो कि बिना किसी देश की मदद से जीवन से लेकर राष्ट्र निर्माण की वस्तुएं बना सकता है और आत्मनिर्भरता के सपने को पूरा कर सकता है|

    • हालांकि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना नया है यह सपना महात्मा गांधी ने आजादी के बाद ही स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया था, पर गरीबी और भुखमरी के कारण उनका सपना साकार ना हो सका|
    • कोरोनावायरस के कारण पिछले कई महीनों से सारा विश्व बंद पड़ा है, जिसके कारण समाज के सभी वर्गों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है खासतौर से हमारे छोटे और मध्यम वर्ग के परिवारों को कमाने खाने की समस्या काफी बढ़ गई है|
    • कोरोना महामारी के कारण किसी भी देश से वस्तुओं का आयात निर्यात बंद है| इसलिए मई के महीने में तालाबंदी के दौरान हमारे प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनाने का आव्हान किया| उन्होंने “लोकल फॉर वोकल” का नारा दिया जिसका अर्थ है कि लोकल में बनी वस्तुओं का उपयोग और उनका प्रचार करना और एक पहचान के रूप में आगे बढ़ना|
    • महामारी के दौरान चीन ने भारत के डोकलाम सीमा क्षेत्र में कब्जा करने की कोशिश की जिसमें भारत के लगभग 20 जवान शहीद हो गए सीमा के इस विवाद में भारत के सैनिकों की क्षति के कारण देश के हर कोने से चीनी सामान को प्रतिबंधित करने की मांग के साथ ही चीनी सामानों को बंद कर दिया गया और प्रधानमंत्री ने सारे देश को आत्मनिर्भर बनने का मंत्र दिया उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर घरेलू चीजों का इस्तेमाल करें ताकि हमारा राष्ट्र मजबूती के साथ खड़ा हो सके|
    • वर्तमान वैश्वीकरण के युग में आत्मनिर्भरता (self -Reliance) की परिभाषा में बदलाव आया है आत्मनिर्भरता आत्म केंद्रित (Self-Centered) से अलग है|
    • भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की संकल्पना में विश्वास करता है |चूँकि भारत दुनिया का ही एक हिस्सा है, अतः भारत उन्नति करता है तो ऐसा करके वह दुनिया की उन्नति में भी योगदान देता है|ऐसा करके भारत दुनिया को प्रगति पथ पर अग्रसर करने में मदद करेगा |

    मिशन की बिंदुवार व्याख्या

    • मिशन को दो भागों में लागु किया जायेगा :

    प्रथम भाग में – चिकित्सा, वस्त्र, इलेक्ट्रानिक, प्लास्टिक, खिलौने जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके |

    द्वितीय भाग में – इस चरण में रत्न एवं आभूषण, फार्मा, स्टील जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जायेगा |

    आत्म निर्भर भारत अभियान निम्नलिखित पांच स्तम्भों पर आधारित है |

    • अर्थव्यवस्था
    • अवसंरचना
    • प्रोधोगिकी संचालित प्रणाली
    • वाइब्रेंट डेमोग्राफी
    • मांग

    आत्मनिर्भर भारत अभियान 3. 0 लाभ तथा विशेषताएं

    • आत्मनिर्भर भारत अभियान 3. 0 की घोषणा हमारे देश की वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गई है|
    • इस योजना को देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए आरंभ किया गया है|
    • हां अमित आत्मनिर्भर भारत अभियान 3.0 में 12 नई घोषणा की गई है जिसके माध्यम से अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा|
    • आत्मनिर्भर भारत अभियान को कोरोनावायरस की महामारी के चलते आरंभ किया गया था|
    • इस योजना के अंतर्गत सभी क्षेत्रों के विकास के लिए निवेश किया गया है|

    अब तक घोषित प्रोत्साहन का सारांश

    • प्रधान मंत्री गरीब कल्याण पैकेज़ – 1,92,800 करोड़ रूपये
    • आत्म निर्भर भारत अभियान 1.0 – 11,02,650 करोड़ रूपये
    • प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना – 82,911 करोड़ रूपये
    • आत्म निर्भर भारत अभियान 2.0 – 73,000 करोड़ रूपये
    • अर्जुन निर्मल भारत अभियान 3.0 – 2,65,080 करोड़ रूपये
    • RBI Measures – 12,71,200 करोड़ रूपये
    • Total- 29,87,641 करोड़ रूपये

  • मध्यप्रदेश-समाचार पत्र (सामान्य ज्ञान)

    मध्यप्रदेश समाचार पत्र (सामान्य ज्ञान)


    • म.प्र. का पहला हिन्दी में प्रकाशित होने वाला समाचार पत्र “मालवा अखबार” था जो 6 मार्च 1848 को इंदौर से प्रकाशित हुआ था, जिसके सम्पादक पण्डित प्रेमनारायण थे।

    • मार्च 2019 में अपने प्रकाशन के 171 वर्ष पूर्ण करने वाला मालवा अखवार होलकर रियासत छापाखाने से प्रकाशित होता था।

    • बनारस से प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र (1845) के बाद हिन्दी में प्रकाशित होने वाला यह दूसरा समाचार पत्र था।

    • यह साप्ताहिक अखबार था इसके आधे भाग में हिन्दी और आधे भाग में उर्दू शब्दों का इस्तेमाल होता था।

    • इसमें समाचार की प्रस्तुति कहानी की तरह होती थी। इसमें इंदौर और आसपास की देशी रियासतों की खबरों को छापा जाता था ।

    • अखबार का आकार 11 बॉय 8 इंच का होता था। पेज आठ होते थे। इसकी भाषा बहुत ही सरल और सटीक होती थी।

    • मध्यप्रदेश का पहला समाचार पत्र ग्वालियर अखबार 1840 में उर्दू में प्रकाशित हुआ था । यह साप्ताहिक था।

    • ग्वालियर अखबार (1840) में ग्वालियर से प्रकाशित हुआ।

    • राज्य में हिन्दी भाषा में प्रकाशित होने वाला प्रथम अखबार मालवा अखबार था।

    • ‘मालवा अखबार’ का प्रकाशन 6 मार्च, 1948 में इंदौर से हुआ । यह भी साप्ताहिक समाचार पत्र था ।

    • मध्यप्रदेश की प्रथम हिन्दी मासिक पत्रिका नवजीवन थी, जो 1915 में प्रकाशित हुई।

    • 1853 में ‘ग्वालियर गजट’ का प्रकाशन प्रारंभ हुआ जो हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित होता था । सन् 1905 में इसका नाम बदलकर ग्वालियर स्टेट गजट कर दिया गया।

    • मध्यप्रदेश में सर्वाधिक समाचार-पत्र भोपाल से प्रकाशित होते हैं।

    • मध्यप्रदेश का सर्वाधिक प्रसार संख्या वाला समाचार पत्र दैनिक भास्कर है।

    • प्रदेश का दूसरा सर्वाधिक प्रसार संख्या वाला समाचार पत्र नई दुनिया का प्रकाशन 5 जून, 1947 को इंदौर से प्रारंभ हुआ।

    • मध्यप्रदेश की एकमात्र खेल पत्रिका “खेल हलचल” के नाम से इंदौर से प्रकाशित की जाती थी।

    • मध्यप्रदेश का प्रथम हिन्दी दैनिक समाचार पत्र “नवजीवन” के नाम से सन् 1939 में इंदौर से प्रकाशित हुआ।

    • 1873 में इंदौर से होल्कर सरकार गजट जबलपुर से ‘जबलपुर समाचार-पत्र’ प्रकाशित हुए।

    • सन् 1887 में रीवा से भारत भ्राता का प्रकाशन आरंभ हुआ।

    • वर्तमान में मध्यप्रदेश का सबसे पुराना समाचार-पत्र मध्यप्रदेश संदेश है, जो पूर्व में “जयाजी प्रताप” के नाम से ग्वालियर (1905) से प्रकाशित होता था।

    • मध्यप्रदेश माध्यम के द्वारा रोजगार एवं निर्माण समाचार पत्र का प्रकाशन किया जाता है।

    • मध्यप्रदेश में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना 1991 में भोपाल में की गई।

    • 19 जून, 1984 में भोपाल के माधवराज से स्मृति समाचार-पत्र संग्रहालय की स्थापना की गई।

    • पत्रकार भवन भोपाल तथा जबलपुर में है ।

    • प्रदेश में पत्रकारों के दो संगठन एक मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ तथा दूसरा मध्यप्रदेश आँचलिक पत्रकार संघ कार्यरत् है ।

  • मध्यप्रदेश से प्रकाशित प्रमुख समाचार पत्र

    मध्यप्रदेश से प्रकाशित प्रमुख समाचार पत्र (सामान्य ज्ञान)

    मध्यप्रदेश से प्रकाशित प्रमुख समाचार पत्र

    (1) राज्य से मराठी का पहला अखबार ‘पूर्ण चन्द्रोदय’ 1 नवंबर, 1860 को प्रारंभ हुआ। वासुदेव बल्लार मुद्दे के संपादन में इंदौर से निकला।

    (2) उर्दू का पहला अखबार आफताब-ए-कुदरत, अब्दुल करीम अंसारी के संपादन में 1865 में भोपाल से प्रकाशित हुआ।

    (3) 1873 में जबलपुर से कृष्णराव के संपादन में जबलपुर समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। यह द्वि-भाषी मासिक अखबार था, जो हिन्दी और अंग्रेजी में छपता था।

    (4) 1883 में भोपाल में अब्दुल करीम ओज के उर्दू पत्र ‘सदाकत’ ने भी व्यवस्था की खामियों के खिलाफ अंगुली उठाई थी, फलतः उन्हें देश निकाला की सजा हुई और 1884 में उन्होंने होशंगाबाद से ‘मोजे नरबदा’ का प्रकाशन किया।

    (5) 1883 में जबलपुर से रामगुलाम अवस्थी के संपादन में साप्ताहिक ‘शुभ चिंतक का प्रकाशन हुआ।

    (6) दादा माखनलाल चतुर्वेदी के संपादन में कर्मवीर का पहले (1920) में जबलपुर से फिर 1935 में खंडवा से प्रकाशन हुआ।

    (7) मध्यप्रदेश का प्रथम दैनिक समाचार पत्र ‘प्रकाश’ 11 जून, 1923 को बुंदेलखण्ड के सागर से मास्टर बलदेव प्रसाद के संपादन में प्रकाशित हुआ।

    (8) इसी कालखंड में जबलपुर से श्री शारदा और छात्र सहोदर (1920), इंदौर से वीणा (1927), खरगोन से वाणी (1930), जबलपुर से प्रेमा (1930), टीकमगढ़ से मधुकर (1940) का प्रकाशन हुआ।

    (9) 1930 में पं. द्वारका प्रसाद मिश्न के संपादन में जबलपुर से ‘दैनिक लोकमत’ निकला। इसे उस समय का संपूर्ण समाचार पत्र माना जाता था।

    (10) मध्यप्रदेश का पहला सांध्य दैनिक प्रदीप 1950 में मोहन सिन्हा के संपादन में जबलपुर से निकला था।

    (11) मध्यप्रदेश जनसंपर्क के वर्ष 2008-09 के प्रतिवेदन के अनुसार 2008 में प्रदेश से 1071 समाचार पत्र और पत्रिकाएँ प्रकाशित हो रही थीं। इनमें 160 दैनिक समाचार पत्र थे, इसके अतिरिक्त 257 साप्ताहिक समाचार पत्र, 92 पाक्षिक, 548 मासिक पत्र-पत्रिकाएँ तथा 24 त्रैमासिक पत्र-पत्रिकाएँ शामिल थे।

  • नीति आयोग (overview)

    नीति आयोग/policy commission (overview)

    नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत है

    नीति आयोग के अन्य सदस्यों में विवेक देवराय, वीके सारस्वत, रमेश चंद्र और विनोद पाल शामिल है

    नीति आयोग – नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफार्मरिंग इंडिया

    • गठन – 1 जनवरी 2015
    • पूर्ववर्ती – योजना आयोग
    • अधिकार क्षेत्र – भारत सरकार
    • मुख्यालय – नई दिल्ली
    • कार्यपालक – नरेंद्र मोदी (अधीक्षक)
    • उपाध्यक्ष – राजीव कुमार
    • संस्थापक – नेशनल डेमोक्रेटिक एलान्स
    • वार्षिक बजट – 339.65 cr
    • मूल एजेंसी – मिनिस्ट्री आफ प्लानिंग

    योजना आयोग और नीति आयोग में मूलभूत अंतर यह है कि इससे केंद्र से राज्य की तरफ चलने वाले एक पक्षीय नीति गण क्रम को एक महत्वपूर्ण विकासवादी परिवर्तन के रूप में राज्यों की वास्तविक और सतत भागीदारी से बदल दिया जायेगा |

    नीति आयोग का उद्द्येश – सतत आधार पर राज्यों के साथ संरचित समर्थन पहलों और प्रणालियों के माध्यम से संघवाद को बढ़ावा देना,” मजबूत राज्य ही मजबूत देश का निर्माण कर सकता है ” इसे मान्यता प्रदान करना|

    • राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों का एक सांझा दृष्टिकोण विकसित करना|
    • सशक्त राज्य ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं इस तथ्य को स्वीकार करते हुए राज्यों के साथ सतत आधार पर संरचनात्मक सहयोग की पहल और तंत्रों के माध्यम से सहयोग पूर्ण संघवाद को बढ़ावा देना|
    • ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजनाएं तैयार करने के लिए तंत्र विकसित करना और इन सभी को उत्तरोत्तर रूप से सरकार के उच्चतर स्तर तक पहुंचाना|
    • जो क्षेत्र विशेष रूप से आयोग को निदृष्ट किए गए हैं उनकी आर्थिक रणनीति और नीति में राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को सम्मिलित करने को सुनिश्चित करना|
    • हमारे समाज के उन विशेष वर्गों पर ध्यान देना जिन तक आर्थिक प्रगति से उचित प्रकार से लाभान्वित ना हो पाने का जोखिम हो|
    • रणनीतिक और दीर्घ अवधि के लिए नीति तथा कार्यक्रम का ढांचा तैयार करना और उनकी प्रगति और क्षमता का मापदंड तैयार करना | अनुवीक्षण और प्रतिक्रिया के आधार पर नवीन सुधार में उपयोग किए जाएंगे जिसके अंतर्गत मध्य अवधि संशोधन भी है|
    • महत्वपूर्ण पणधारियों तथा समान विचारधारा वाले राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय थिंक टैंक और साथ ही साथ शैक्षिक और नीति अनुसंधान संस्थाओं के बीच परामर्श और भागीदारी को प्रोत्साहन देना|
    • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों वृतिकों तथा अन्य भागीदारों के सहयोगात्मक समुदाय के माध्यम से ज्ञान व नवाचार, उद्यमशीलता, सहायक प्रणाली बनाना|
    • विकास के एजेंडे के कार्यान्वयन में तीव्रता लाने के क्रम में अंतर क्षेत्रीय और अंतर्विभागीय मुद्दों के निपटान (समाधान )के लिए एक मंच प्रदान करना|
    • अत्याधुनिक संसाधन केंद्र बनाना जो सुशासन तथा सतत और न्याय संगत विकास की सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रणाली पर अनुसंधान करने के साथ-साथ पण धारियों तक पहुंचाने में भी मदद करें|
    • आवश्यक संसाधनों की पहचान करने सहित कार्यक्रमों और उपायों के कार्यान्वयन का सक्रिय मूल्यांकन और सक्रिय अनुवीक्षण करना, ताकि सेवाएं प्रदान करने में सफलता की संभावनाओं को प्रबल बनाया जा सके|
    • कार्यक्रमों और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर जोर|
    • राष्ट्रीय विकास और एजेंडा और उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अन्य आवश्यक गतिविधियों का उत्तरदायित्व लेना|

    विशेषताएं – नीति आयोग स्वयं को एक अत्याधुनिक संसाधन केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है जिसमें आवश्यक संसाधन, ज्ञान और कौशल है| जो इसे गति के साथ कार्य करने, अनुसन्धान और नवाचार को बढ़ावा देने, सरकार के लिए कार्यनीतिक नीति दृष्टि प्रदान करने और आकस्मिक मुद्दों का समाधान करने में सक्षम करेगा |

    नीति आयोग की संपूर्ण गतिविधियों को चार मुख्य प्रमुखों में विभाजित किया जा सकता है

    • 1- नीति निर्माण और कार्यक्रम की रूपरेखा|
    • 2- सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना|
    • 3- अनुवीक्षण और मूल्यांकन|
    • 4- थिंक टैंक और ज्ञान एवं नवोन्मेष हब|

    नीति आयोग के विभिन्न वर्टिकल इसके अधि देश को पूरा करने के लिए नीति आयोग के लिए आवश्यक समन्वय और सहायक ढांचा प्रदान करते हैं| वर्टिकल की सूची निम्नानुसार है :-

    • 1- कृषि
    • 2- महिला एवं बाल विकास
    • 3- स्वास्थ्य
    • 4- शासन एवं अनुसन्धान
    • 5- मानव संसाधन विकास
    • 6- कौशल विभाग और रोज़गार
    • 7- सतत विकास लक्ष्य
    • 8- ग्रामीण विकास
    • 9- ऊर्जा
    • 10- शहरी प्रबंधन
    • 11- उद्योग
    • 12- अवसंरचना
    • 13- वित्तीय संसाधन
    • 14- प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण
    • 15- विज्ञानं और तकनीक
    • 16- राज्य समन्वय और विकेन्द्रीकृत योजना
    • 17- सामाजिक न्याय और अधिकारिता
    • 18- भूमि और जल संसाधन
    • 19- डेटा प्रबंधन और संसाधन
    • 20- सार्वजनिक निजी भागीदारी
    • 21- परियोजना मूल्यांकन और प्रबंध प्रभाग (पी ए ऍम डी )
    • 22- विकास अनुवीक्षण और मूल्यांकन कार्यालय
    • 23- राष्ट्रिय श्रम अर्थशास्त्र अनुसन्धान और विकास संसाधन(एन आई एल ई आर डी )

  • मध्यप्रदेश के न्यायाधीश (Chief Justice)

    मध्यप्रदेश के न्यायाधीश (सामान्य ज्ञान)

    क्र. नाम – कार्यकाल

    1. श्री एम. हिदायतुल्ला – 01.11.1956 से 12.12.1958

    2. श्री जी.पी.भट्ट – 13.12.1958 से 22.09.1959

    3. श्री पी.वी.दीक्षित – 22.09.1959 से 18.03.1969

    4. श्री विशंभर दयाल – 19.03.1969 से 13.09.1972

    5. श्री पी.के.तारे – 14.09.1972 से 10.10.1975

    6. श्री शिवदयाल श्रीवास्तव – 11.10.1975 से 27.02.1978

    7. श्री ए.पी.सेन – 28.02.1978 से 14.07.1978

    8. श्री जी.पी. सिंह – 27.07.1978 से 03.01.1984

    9. श्री जी.एल.ओझा – 01.12.1984 से 27.10.1985

    10. श्री जे.एस.वर्मा – 14.06.1986 से 28.08.1986

    11. श्री एन.डी.ओझा – 08.01.1987 से 18.01.1988

    12. श्री जी.जी. सोहोनी – 21.10.1989 से 23.10.1989

    13. श्री एस.के.झा – 27.10.1989 से 15.12.1993

    14. श्री यू.एल.भट्ट – 16.12.1993 से 14.10.1995

    15. श्री ए.के.माथुर – 03.02.1996 से 21.12.1999

    16. श्री भवानी सिंह – 24.02.2000 से 19.08.2003

    17. श्री के. राजरत्नम – 06.09.2003 से 12.03.2004

    18. श्री राजीव गुप्ता (कार्यवाहक) – 12.03.2004 से 08.07.2004

    19. श्री आर.वी.रविन्द्रन – 08.07.2004 से 09.09.2005

    20. श्री अनंग कुमार पटनायक – 02.10.2005 से 19.12.2009

    21. श्री सैयद रफत आलम – 20.12.2009 से 04.08.2011

    22. श्री सुशील हरकोली (कार्यवाहक) – 05.08.2011 से 16.10.2012

    23. श्री शरद अरविंद बोबडे – 16.10.2012 से 10.04.2013

    24. श्री कृष्ण कुमार लाहोटी (कार्यवाहक) – अप्रैल 2013 से 23.11.2013

    25. श्री अजय माणिकराव खानविलकर – 24.11.2013 से 12.05.2016

    26. श्री राजेन्द्र कुमार मेनन (कार्यवाहक) – मई 2016 से 17.03.2017

    27. श्री हेमन्त गुप्ता – 18.03.2017 से 01.11.2018

    28. श्री संजय सेठ – 14.11.2018 से 10.06.2019

    29. श्री रविशंकर झा (कार्यकारी) – 11.06.2019 से 05.10.2019

    30. श्री संजय यादव (कार्यकारी) – 06.10.2019 से 02.11.2019

    31. श्री अजयकुमार मित्तल – 03.11.2019 से 29.09.2020

    32. श्री संजय यादव (कार्यवाहक) – 30.09.2020 से 02.01.2021

    33. श्री मोहम्मद रफीक – 03.01.2021 से अब तक

  • मध्य प्रदेश की जलवायु

    मध्य प्रदेश की जलवायु (सामान्य ज्ञान)

    (1) किसी भी क्षेत्र में लम्बे समय तक पायी जाने वाली ताप, वर्षा, वायु, आर्द्रता आदि की मात्रा, अवस्था तथा गति का औसत रूप में पाया जाना वहाँ की जलवायु कहलाती है।

    (2) म.प्र. में मानसूनी जलवायु है।

    (3) जलवायु के आधार पर म.प्र.को चार भागों में बाँटा गया है –
    1. उत्तर का मैदान- इसमें बुन्देलखण्ड, मध्यभारत, रीवा-पन्ना का पठार शामिल है। समुद्र से दूर होने के कारण यहाँ पर गर्मी में अधिक गर्मी और ठण्ड में अधिक ठण्ड पड़ती है।
    2. मालवा का पठार- यहाँ की जलवायु सम पायी जाती है अर्थात् यहाँ पर न तो ग्रीष्म ऋतु में अधिक गर्मी और न शीत ऋतु में अधिक सर्दी पड़ती है।
    3. विन्ध्य का पहाड़ी प्रदेश- इसमें अधिक गर्मी नहीं पड़ती और ठण्ड में भी साधारण ठण्ड पड़ती है। विन्ध्याचल पर्वत का क्षेत्र सम जलवायु क्षेत्र है । पचमढ़ी, अमरकंटक आदि इसके अंतर्गत आते हैं।
    4. नर्मदा की घाटी- यहाँ की मानसूनी जलवायु है। गर्मी में अधिक गर्मी तथा ठण्ड में साधारण ठण्ड पड़ती है। इसके निकट से कर्क रेखा गुजरती है।

    (4) सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होने से ताप और दाब में परिवर्तन होने से जलवायु में परिवर्तन आता है।

    (5) सूर्य का उत्तरायण होना-21 मार्च और 23 सितम्बर को सूर्य भूमध्य रेखा पर लम्बवत् चमकता है और इसी स्थिति में दिन-रात बराबर होते हैं।

    (6) 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकता है । इस समय उत्तरी गोलार्द्ध पर ताप बढ़ जाता है।

    (7) अधिकांश वर्षा दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से होती है।

    (8) रीवा-पन्ना के पठार में दक्षिण-पूर्वी मानसून से भी वर्षा होती है।

    (9) म.प्र. में मध्य जून से सितम्बर तक वर्षा होती है।

    (10) सबसे अधिक वर्षा पचमढ़ी में 199 सेमी. होती है।

    (11) सबसे कम वर्षा भिण्ड में 55 सेमी. होती है।

    (12) प्रदेश में औसत वर्षा 112 सेमी. होती है।

    (13) 75 सेमी.से कम वर्षा का क्षेत्र पश्चिमी क्षेत्र है।

    (14) 75 सेमी. से अधिक वर्षा का क्षेत्र पूर्वी क्षेत्र कहलाता है।

    (15) पूर्वी क्षेत्र में वर्षा का औसत 140 सेमी. के लगभग है, जबकि प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र में वर्षा का औसत 75 सेमी. है।

    (16) 23 सितम्बर से सूर्य दक्षिणायन होता है अर्थात् सूर्य दक्षिण गोलार्ड की ओर बढ़ने लगता है, फलतः ताप बढ़ता है।

    (17) 22 दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा पर होता है। इससे दक्षिण गोलार्द्ध पर ताप बहुत बढ़ जाता है और उत्तरी गोलार्द्ध पर ताप कम हो जाता है, जिससे गर्मी और सदी की मात्रा बढ़ जाती है।

    (18) म.प्र. में ऋतु संबंधी आँकड़े एकत्रित करने वाली वेधशाला इंदौर में हैं।

    (19) कर्क रेखा म.प्र. के मध्य से गुजरती है।

    (20) प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी दोनों मानसूनों से वर्षा होती है।

    (21) सर्वाधिक तापमान गंजबासौदा में 48.7° से. मापा गया।

    (22) म.प्र. का औसतन ताप 21 सेंटीग्रेड आँका गया है।

    (23) सबसे कम तापमान शिवपुरी का मापा गया ।

    (24) शीत ऋतु में अधिकतम सूखा रहता है ।

    (25) म.प्र. की जलवायु को उष्णकटिबंधीय स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रदेश के मध्य से गुजरने वाली ‘कर्क रेखा’ उत्तरदायी है, जबकि दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होने वाली वर्षा इसे मानूसनी जलवायु का स्वरूप प्रदान करती है।

  • मध्य भारत का पठार

    • यह 24° से 26°48’उत्तरी अक्षांश व 74°50 ‘ से 79° 10’ पूर्वी देशांतर तक विस्तृत है|
    • नदिया-चंबल, सिंध, पार्वती, क्वारी, कुनो आदि|
    • क्षेत्रफल -32896 वर्ग किमी (प्रदेश का 10.7%)
    • जिले- भिंड, मुरैना, शिवपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, नीमच और मंदसौर|
    • तापमान – अधिकतम 40°से. 44°से.
    • न्यूनतम – 17°से. 18°से.
    • वर्षा – 75से. मी. से कम
    • वन – 20 से 27% वन (शीशम, खैर, बबूल )
    • मिटटी – जलोढ़ तथा काली
    • उद्योग – कैलारस (सहकारी शक्कर) डबरा, गुना (चीनी कारखाना), शिवपुरी व बानमौर (खैर उद्योग), बानमौर सीमेंट व ग्वालियर में कृत्रिम रेशा, बिस्कुट, चीनी मिट्टी बर्तन |
    • दर्शनीय स्थल – ग्वालियर दुर्ग (सूरजसेन निर्मित 525ई. )में गुजरी महल, हाथी फोड़ द्वार, हिण्डोला द्वार, मोती महल, सास -बहु मंदिर, तेली मंदिर, जैन मूर्तियां आदि (कार्गो हवाई अड्डा, डबरा )|

    इतिहास

    • गुप्तेश्वर उत्खनन (ग्वालियर ) से 40 से 50 हजार वर्ष पूर्व प्रागैतिहासिक मानव समुदायों को बसाहट का ज्ञान होता था |
    • पद्मावती (पवाया) नागवंशियों की राजधानी थी |इस क्षेत्र में गुप्त शाशकों का भी राज रहा है |
    • ग्वालियर शिलालेख के अनुसार हूण राजा मिहिरकुल ने भी यहां राज किया |
    • आठवीं शताब्दी में गुर्जर -प्रतिहारों ने सत्ता स्थापित की |
    • राष्ट्रकूटों ने गुर्जर -प्रतिहारों को परास्त किया था व द्राविड़ शैली के तेली मंदिर के निर्माणकर्ता समभवतः राष्ट्रकूट ही थे (आठवीं शताब्दी )|
    • ग्यारहवीं शताब्दी में चन्देलों ने ग्वालियर पर शासन किया |चन्देलों ने कच्छपों को अपना प्रशासक बनाया, जिन्होंने ग्वालियर किले में सहस्त्रबाहु का मंदिर तथा सिहोनिया में ककन मठ मंदिर बनाया |
    • तोमर वंश 1394 ई. में शुरू हुआ, जब ग्वालियर को वीर सिंह तोमर ने जीता |
    • मानसिंह तोमर (1486) ने ललित कला का विकास किया, 1517ई. में इब्राहिम लोधी ने विक्रमजीत तोमर से ग्वालियर को जीता | बाद में ग्वालियर 1754 ई. तक मुगलों के अधीन रहा |
    • मराठा वंश के महादजी सिंधिया ने यहां शासन सत्ता स्थापित की तत्पश्चात दौलत राव सिंधिया ने अपनी राजधानी उज्जैन से लश्कर स्थानांतरित की |
    • सन 1951 में मध्य भारत पठार व मालवा को मिलाकर ‘मध्य भारत प्रान्त ‘ बनाया गया व जीवाजी राव सिंधिया यहां के राज प्रमुख नियुक्त हुए | सन 1956 में इस प्रान्त का विलय मध्य प्रदेश में हुआ |