Author: competitiveworld27

  • मालवा का पठार

    प्रदेश के पश्चिमी भाग में लावा मिट्टी (दक्कन ट्रैप चट्टानों) से निर्मित नर्मदा घाटी के उत्तर में विंध्याचल श्रेणी से पूर्व में अशोकनगर से पश्चिम में मंदसौर तक 74°17′ से 79°20′ पूर्वी देशान्तर व 20°17′ से 25°’ उत्तरी अक्षांश के मध्य स्थित है |

    इतिहास

    मौर्य युग में मालवा का पश्चिमी भाग अवंतिका (राजधानी उज्जैन) कहलाता था तथा पूर्वी भाग अकरा (राजधानी-विदिशा )|

    मालवा का नामकरण अत्यंत पूरा -ऐतिहासिक जाति मालव, जिसका मूल निवास पंजाब में चिनाब तथा राबी नदियों के बीच रेचना दोआब में था, के नाम पर हुआ है |इन्ही मालव जाति के लोगो ने छठी शताब्दी में यहां सत्ता स्थापित की |बाद में परमार, मुस्लिम, सूरी एवं खिलजी तथा मुग़ल शाशकों ने यहां राज किया |18वीं सदी में पेशवाओं ने तत्पश्चात पेशवाओं को हरा कर अंग्रेजों ने 1818 ई. में सत्ता स्थापित की |यहां की रियासतों को मध्य भारत के नाम से जाना जाता था, जो वर्ष 1956(राज्य पुनर्गठन )में मध्य प्रदेश में सम्मिलित हुई |

    • क्षेत्राफल – 88222. 2वर्ग किमी (मध्य प्रदेश का 28.62%)
    • जिले – 17 जिलों का पूर्ण आंशिक भाग आता है-मंदसौर, राजगढ़, उज्जैन (नागदा -प्रस्तावित ) इंदौर, भोपाल, धार, गुना, रतलाम, झाबुआ, देवास, शाजापुर, सीहोर, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सागर व अलीराजपुर |
    • नदियां-काली सिन्ध, क्षिप्रा, पार्वती, चम्बल, बेतवा।
    • तापमान-अधिकतम 40° से. न्यूनतम 10-12° से.
    • वर्षा- 125 से 75 से.मी.
    • वन भूमि- 39 से 40% तक
    • उद्योग-नागदा-कृत्रिम रेशा। इन्दौर, रतलाम, देवास, उज्जैन व भोपाल में सूती कपड़ा भारत है। इलैक्ट्रिकल्स लि.-भोपाल। पीथमपुर-ऑटोमोबाइल उद्योग।
    • पर्वत- महू की जानापाव पहाड़ी (854 मी.) से चम्बल नदी का उद्गम (बान्वू प्वाइंट)। मालवा के पठार की सबसे ऊंची चोटी सिगार चोटी है। इसकी ऊंचाई 881 मीटर है।
    • वर्ष 2012 में मंदसौर को पवित्र नगर घोषित किया गया।

  • मध्य प्रदेश पंचायत राज एक्ट- 1993

    मध्य प्रदेश पंचायत राज एक्ट- 1993 (सामान्य ज्ञान)

    म.प्र. पंचायती राज एक्ट 1993

    73वें संविधान संशोधन 1992 को 22 दिसंबर, 1992 को लोकसभा तथा 23 दिसंबर, 1992 को राज्य सभा द्वारा पारित किया गया ।

    20 अप्रैल, 1993 को राष्ट्रपति की अनुमति के बाद 24 अप्रैल, 1993 को लागू किया । 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।

    इसमें भाग-9, 11वीं अनुसूची (29 विषय) तथा 16 अनुच्छेद 243 से 243 (0) तक जोड़े गए।

    म.प्र. इसका अनुपालन करने वाला पहला राज्य है।
    29 दिसंबर, 1993 को राज्य विधानसभा में म.प्र. पंचायती राज अधि.विधेयक प्रस्तुत किया जिसे 30 दिसंबर, 1993 को पारित किया गया ।

    24 जनवरी, 1994 को राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हुई तथा 25 जनवरी,1994 को प्रथम बार प्रकाशित और प्रवृत्त हुआ।

    म.प्र. में पंचायतीराज संस्थाओं का संगठन एवं कार्य निम्न प्रकार हैं-

    ग्राम सभा

    राज्यपाल किसी ग्राम अथवा ग्रामों के समूह को एक ग्राम के रूप में स्पष्ट करते हैं।

    इस ग्राम या ग्राम समूह के निवासी व वयस्क मतदाताओं के समूह को ग्राम सभा के रूप में मान्यता दी जाती है।

    ग्राम सभा में तीन महीने में एक मीटिंग अनिवार्य है।

    ग्रामपंचायतों के सभी कार्यों की जाँच करती है।

    ग्राम सभा अपने समस्त कार्य को समितियों के माध्मम से संचालित करती है।

    इस प्रकार ग्राम सभा विधायिका व ग्राम पंचायत कार्यपालिका के रूप में कार्य करती है।

    आरक्षण

    म.प्र. पंचायती व्यवस्था के तीनों स्तरों के लिए यह प्रावधान है कि अनुसूचित जाति/जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुपात में पद आरिक्षत है।

    यदि अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण कुल सीटों के 50% से कम है, तो 25% स्थान पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगे।

    तीनों स्तर में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत स्थान आरक्षित रखे गये है।

    पंचायतों का गठन- म.प्र. में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था स्वीकार की गई है।

    ग्राम के लिए ग्राम पंचायत, विकासखण्ड स्तर पर जनपद पंचायत एवं जिले के लिए पंचायत का गठन किया गया है।

    ग्राम पंचायत

    संगठन-ग्राम पंचायत में वार्डों की संख्या न्यूनतम 10 और अधिकतम 20 होती है।

    1000 तक की आबादी वाली पंचायतों में कम-से-कम 10 वार्ड होते हैं।

    सभी वार्डों में जनसंख्या समान होती है।

    ग्राम पंचायत का प्रमुख सरपंच होता है और उसका निर्वाचन प्रत्यक्ष होता है।

    प्रत्येक वार्ड का निर्वाचक प्रतिनिधि पंच कहलाता है।

    सरपंच के सहायक रूप में उप सरपंच होता है, जो पंचों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है।

    पंच बनने के लिए ग्राम में कम-से-कम 6 माह निवास करना जरूरी है।

    वह 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका तथा पागल दिवालिया या अपराधी नहीं होना चाहिए।

    वह 26 जनवरी, 2001 के बाद दो से अधिक बच्चे न हों।

    ग्राम पंचायत की वर्ष में 4 बैठकें होना चाहिए।

    शासकीय या ग्राम पंचायत द्वारा संवैधानिक कर्मचारी की नियुक्ति की जाती है, जो पंचायत सचिव कहलाता है।

    वह कार्यों का लेखा-जोखा रखता है तथा पंचायत के निर्णयों को कार्यान्वित करता है।

    कार्य

    पंचायत क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक विकास हेतु ग्राम पंचायतों के कार्य का उल्लेख अधिनियम के की धारा 49 में किया गया है इसके निम्न कार्य हैं-
    1. पंचायत क्षेत्र के आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय के लिए वार्षिक योजना तैयार करना और जनपद पंचायत की योजना में सम्मिलित करने के लिए प्रस्तुत करना।
    2. ग्राम सभा के अनुमोदन से विभिन्न कार्यक्रमों के लिए
    हितग्राहियों को चुनना।
    3. गाँव की सफाई, स्वास्थ्य व शिक्षा सेवाओं को संचालित करना।
    4. सार्वजनिक कुँओं, तालाबों, पुलियों का निर्माण करना।
    5. जन्म, मृत्यु का पंजीयन,बाजार एवं मेलों का प्रबंध, वृक्षारोपण तथा वनों का संरक्षण, कृषि एवं बागवानी, विकास एवं ग्राम पंचायत के भीतर सभी विकास कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना एवं उनका पर्यवेक्षण करना।
    6. जन साधारण में सामान्य चेतना की अभिवृद्धि करना।
    7. विभिन्न प्रकार के कर लगाना और वसूल करना।

    जनपद पंचायत

    जनपद पंचायतों में वार्डों की संख्या कम-से-कम 10 एवं अधिक-से-अधिक 25 होती है।

    5 हजार की आबादी पर एक वार्ड होता है।

    सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रीति से एवं अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।

    सरकार द्वारा नियुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत के निर्णयों को कार्यान्वित करता है तथा कार्यों का लेखा-जोखा रखता है।

    यह अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवाका सदस्य होता है।

    कार्य

    पंचायत अधिनियम के की धारा 50 में जनपद पंचायत निम्न कार्यों के लिए उत्तरदायी है-
    1. एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम व अन्य ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों का संचालन करना।
    2. कृषि,सामाजिक वानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन।
    3. बाढ़, सूखा, महामारी, टिड्डी दल का प्रकोप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय सहायता कार्यक्रम संचालित करना।
    4. महिलाओं, बच्चों, निराश्रितों, पिछड़े वर्गों आदि का कल्याण।
    5. शिक्षा, शालाओं का प्रबंधव निरीक्षण।
    6. केन्द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा सौंपे गये कार्य को संपादित करना। जनपद पंचायत ऐसे कार्य को करने के लिए बाध्य होती है।

    जिला पंचायत

    संगठन– जिले के समस्त जनपद पंचायतों को मिलाकर जिला पंचायत बनती है।

    इसमें न्यूनतम 10 वार्ड और अधिकतम 35 वार्ड होते हैं।

    प्रत्येक वार्ड में 50 हजार की जनसंख्या होती है।

    जिला पंचायत के सदस्यों द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव किया जाता है।

    जिला पंचायत कार्यकारी शक्तियाँ सरकार द्वारा नियुक्त जिला पंचायत सचिव में निहित होती है।

    यह अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा का सदस्य होता है।

    यह जिला पंचायत के निर्णयों को कार्यान्वित कर लेखा-जोखा रखता है।

    कार्य

    जिला पंचायत के निम्न कार्य हैं –
    1. जिला ग्रामीण विकास अभिकरण द्वारा संचालित किये जा रहे कार्यक्रमों का नियंत्रण एवं निर्देशन करना।
    2. जिले के आर्थिक विकास व सामाजिक न्याय के लिए वार्षिक योजनायें बनाना व उनका क्रियांवयन करना।
    3. केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा प्रत्यायोजित किए गये कार्यों का संपादन करना।
    4. परियोजनाओं के संबंधों में केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई निधियों को जनपद व ग्राम पंचायतों को आवंटित करना।

  • विन्ध्यन कगारी प्रदेश

    विन्ध्यन कगारी प्रदेश

    • मध्य प्रदेश के मध्य उत्तर में 23°10′ से 25°12′ उत्तरी अक्षांश  तथा 78°4′ से 82°48′ पूर्वी देशांतर तक यह पठार फैला हुआ है। इसकी ऊंचाई 300-600 मी. है।

    • क्षेत्रफल 31954.8 वर्ग कि.मी. (मध्य प्रदेश का 10.37%)।

    इतिहास


    • प्रारंभिक ज्ञात वंश हैहय वंश है, जिसने कालिंजर (249 ई.) को राजधानी बनाया। तत्पश्चात् गुप्त वंशियों का शासन रहा।
    • हैहय वंशियों को यशोवर्मन चन्देल (खजुराहो) ने हराया था (925-955 ई.) किन्तु 12वीं शताब्दी तक हैहय बने रहे।
    • 14वीं शताब्दी में कालिंजर को बुन्देलों ने जीता व छत्रसाल बुन्देला पन्ना रियासत के प्रतापी राजा रहे।
    • 1948 ई. में विन्ध्य प्रदेश अस्तित्व में आया, जिसे 1956 में मध्य प्रदेश में मिलाया गया।
    • जिले-रीवा, सतना, पन्ना, दमोह व सागर की रहली तथा बण्डा तहसीलें।
    • नदियां-केन, सोनार, टोंस, बीहड़, ब्योरमा, सतना आदि।
    • तापमान-42° से. (अधिकतम) 8° से. (न्यूनतम)
    • मिट्टी-लाल, लाल-काली, मिश्रित लाल-पीली।
    • उद्योग-सीमेन्ट-सतना, लाख-रीवा
    • खनिज-सतना चूना उत्खनन व बॉक्साइट|

    • कोरंडम -रीवा
    • जिप्सम -रीवा
    • हीरा -पन्ना जिले की मझगवां व रमखेड़िया खदानों में |
    • पर्यटन -चचाई, बहुटी व केवटी प्रपात, भरहुत स्तूप (सतना ) अशोक मौर्यकालीन है तथा चित्रकूट व मैहर पवित्र नगर है (टोंस नदी पर बिहार प्रपात है )|
  • मध्य प्रदेश के प्राकृतिक विभाग

    • भौतिक संरचना की दृष्टि से मध्य प्रदेश को निम्न प्रदेशों व उप प्रदेशों में बांटा जा सकता है: मध्य प्रदेश भू वैज्ञानिक दृष्टि से प्राचीनतम गोंडवाना लैंड का हिस्सा है| गोंडवाना का विस्तार उत्तर व उत्तर-पूर्व की ऒर अभिसरण (convergence) हुआ है, जो वर्तमान में दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय भाग के रूप में विस्तृत है दक्षिण प्रायद्वीपीय पठार के उत्तरी भाग में मध्य प्रदेश राज्य स्थित है इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश एक स्थल बद्घ (Land Locked) राज्य है क्योंकि इसकी भौगोलिक सीमाएं समुद्र तट व अंतर्राष्ट्रीय सीमा को स्पर्श नहीं करती है|
    • मध्य उच्च प्रदेश – मध्य भारत का पठार, बुंदेलखंड पठार, मालवा पठार, रीवा पन्ना पठार, नर्मदा सोन घाटी
    • सतपुड़ा मैकल श्रेणी – (वर्धा , पूर्णा, ताप्ती, तवा, बेनगंगा, पेंच आदि नदियां)
    • पूर्वी पठार (बघेलखण्ड पठार)-शहडोल, अनूपपुर,उमरिया आदि
    • प्रदेश के प्राकृतिक विभागों का विवरण इस प्रकार है : मध्य प्रदेश आकिर्यन (आद्य महाकल्प ), धारवाड़, कुड़प्पा, विंध्य, गोंडवाना क्रम की चट्टानों के निक्षेप पाये जाते हैँ तथा मध्य प्रदेश की भू-गार्भिक संरचना का निर्माण काल से लेकर क्वॉटरनरी काल तक की चट्टानों से हुआ है| मध्यप्रदेश में आकिर्यन, विंध्यन एवं दक्कन ट्रैप की चट्टानों का सर्वाधिक विस्तार पाया जाता है|चट्टानों का प्राचीनतम समूह जो की आकिर्यन (कार्यान्तरित ) तथा प्रोटेरोज़ोइक (जीवन के प्रारंभिक समय में विकसित) चट्टानों से मिल कर बना है, जिससे मध्य प्रदेश के लगभग 45 प्रतिशत क्षेत्र का निर्माण हुआ है |इसके अतिरिक्त कार्बोनिफेरस से लेकर क्रेटेशियस काल की चट्टानों से मिल कर गोंडवाना शैल समूह का निर्माण हुआ है, जिससे मध्य प्रदेश के लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्र का एवं क्रेटेशियस एवं पेलियोसीन काल में निर्मित दक्कन ट्रैप की बेसाल्ट चट्टानों से मध्य प्रदेश के 38 प्रतिशत क्षेत्र का निर्माण हुआ है |
  • मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान (भाग-3)

    मध्य प्रदेश के राजकीय चिन्ह

    • राजकीय पुष्प – सफेद लिली
    • राजकीय पशु – बारहसिंघा(बेडरी प्रजाति) (रूसवर्स डुबाउसेली, वर्ष 1981 में घोर्षित)
    • राजकीय पक्षी – दूधराज या शाही बुलबुल (पैराडाइस फ्लाईकैचर, वर्ष 1981 में घोर्षित)
    • राजकीय वृक्ष – बरगद (फाइकस बेनगैलेसिस, वर्ष 1971 में घोर्षित)
    • राजकीय मछली – महाशीर (टौर प्यूटिटौरा, वर्ष 2011 में घोर्षित)
    • राजकीय खेल – मल्खम (वर्ष 2013 में घोर्षित
    • राजकीय फसल – सोयाबीन (ग्लाइसिन मैक्स )
    • राजकीय फल – आम (मेगीफेरा इंडिका)
    • राजकीय नृत्य – राई (बुंदेलखंड )
    • राजकीय नाट्या – माचा (मालवा क्षेत्र )
    • राजकीय चिन्ह – 24 स्तूपों की बाह्य आकृति के मध्य गेहूं और धान की बालियाँ तथा बरगद के ऊपर अशोक स्तम्भ
    • राजकीय गान-  सुख का दाता,  सब का साथी,  शुभ का यह सन्देश है,  माँ की गोद,  पिता का आश्रय मेरा मध्य प्रदेश है (रचनाकार – श्री महेश श्रीवास्तव, वर्ष 2010)
    • राजकीय भाषा – हिंदी
    • राज्य दिवस – 1 नवम्बर
    • मध्य प्रदेश को हृदय प्रदेश की संज्ञा देने वाले व्यक्ति – पडित जवाहर लाल नेहरू
  • Number Test and Ranking Test (Reasoning)

    Number Test and Ranking Test (Reasoning)

    NUMBER TEST

    In such test, generally you are given a
    long series of numbers. The candidate
    is required to find out how many times a number satifying the conditions specified in the question occurs.

    EXAMPLE . How many 8s are there in the following number sequence which
    are immediately preceded by 5 but not
    immediately followed by 3?
    3 8 5 8 4 5 8 3 9 8 8 5 8 8 8 9 3

    Sol. Let use see the following:
    3 8  5 8 4  5  8  3  9  8 8  5   8
    8 8  9 3
    Clearly, two such 8s are there.

    Remember
    There is no rule as how to attempt these
    questions but we can practice these
    questions:

    RANKING TEST

    Ranking involves determining the sequencial order of one or more
    persons/objects based on comparison
    of parameters such as height, weight,
    age, length, position, merits etc. For comparison, generally following symbols are used:
    (i) A>B (means A is greater/heavier/
    taller/higher /more than B)
    (ii) A<B (means A is smaller / lighter /
    shorter / lower / less than B)

    Questions based on ranking are generally given with a set of information in jumbled form based on which the candidates are
    required to systematically arrange the given information and determine the sequencial order of arrangement of the various persons/objects.

    EXAMPLE. N is more intelligent
    than M. M is not as intelligent as Y. X is
    more intelligent than Y but not as good
    as N. Who is the most intelligent of all?
    (a) N (b) M (c) X (d) Y
    Sol.(a) According to the question,
    N>M
    Y>M
    N>X>Y
    On arranging the above data,
    we get, N>X>Y>M
    So, N is the most intelligent
    among them.

    EXAMPLE. Shailendra is shorter than Keshay but taller than Rakesh,Madhav is the tallest. Aashish is a little shorter than Keshav and little taller than Shailendra. If they stand in the order of increasing heights, who will be the second?
    (a) Aashish (b) Shailendra (c) Rakesh (d) Madhav
    Sol. (b) According to the question,
    K>S>R
    (K= Keshay
    S=Shailendra
    R= Rakesh
    M = Madhav
    A = Aashish)
    Madhav is the tallest.
    K>A>S
    On arranging the above data,
    we get,
    M >K>A>S>R
    or
    R=1<S=2<A=3<K=4<M=5

    Hence, Shailendra will be the
    second.

  • मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान (भाग-2)

    मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान (10 important points)

    • मध्य प्रदेश की संस्कार राजधानी – जबलपुर
    • मध्य प्रदेश की पर्यटन एवं ग्रीष्म राजधानी- पचमढ़ी होशंगाबाद
    • मध्य प्रदेश की खेल राजधानी – इंदौर 
    • मध्यप्रदेश की राजकीय भाषा – हिंदी  
    • मध्य प्रदेश का  राज्य दिवस – 1 नवम्बर
    • भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार-ज्यामितीय आकर – आयताकार
    • भौगोलिक अवस्थित -वर्ष 1956-17°46 उत्तरी अक्षांश 26°30 उत्तरी अक्षांश तथा 74°9 पूर्वी देशान्तर से 84°51 पूर्वी देशान्तर तथा वर्तमान में 21°6 उत्तरी अक्षांश से 26°30 उत्तरी अक्षांश तथा 74°9 पूर्वी देशांतर से 82°48 पूर्वी देशान्तर
    • भौगोलिक विस्तार : वर्ष 1956-पूर्व से पश्चिम विस्तार -996 किमी तथा उत्तर से दक्षिण विस्तार -1127 किमी वर्तमान :पूर्व से पश्चिम विस्तार 870 किमी. तथा उत्तर से दक्षिण विस्तार -605किमी.
    • क्षेत्रफल : वर्ष 1956 -4, 43, 446 वर्ग किमी (13. 49%) तथा वर्तमान में 3, 08, 245 वर्ग किमी (9. 38%) विशेष तथ्य -1 नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से पृथक कर भारत के 26 राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ का गठन किया गया था जिसमें मध्य प्रदेश के कुल क्षेत्रफल 4,43,446 वर्ग किलोमीटर में से 1,35,191 वर्ग किमी क्षेत्रफल छत्तीसगढ़ में सम्मिलित किया गया था । छत्तीसगढ़ विभाजन के पश्चात मध्य प्रदेश का कुल क्षेत्रफल 308252 वर्ग किमी था किंतु मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के मध्य अमरकंटक क्षेत्र में अवस्थित केयर घाटी विवाद के कारण मध्य प्रदेश का वर्तमान क्षेत्रफल 308245 वर्ग किमी है मध्य प्रदेश का क्षेत्रफल की दृष्टि से देश में राजस्थान(3,42,239 वर्ग किमी ) के पश्चात् दूसरा स्थान है ।
    • सीमावर्ती राज्य :वर्ष 1956 में मध्य प्रदेश के सीमावर्ती राज्यों की कुल संख्या 7 थी जिसमें महाराष्ट्र बिहार उत्तरप्रदेश राजस्थान गुजरात उड़ीसा एवं आंध्र प्रदेश सम्मिलित थे वर्तमान मध्य प्रदेश के सीमावर्ती राज्यों की कुल संख्या 5 है मध्य प्रदेश के उत्तर में उत्तर प्रदेश दक्षिण में महाराष्ट्र दक्षिण पूर्व में छत्तीसगढ़ उत्तर पश्चिम में राजस्थान पूर्व में छत्तीसगढ़ एवं पश्चिम में गुजरात राज्य स्थित है ।
  • मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान (भाग-1 )

    मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान (10 important points)

    • स्थापना- 1 नवंबर 1956
    • मध्य प्रदेश का पुराना नाम- सेंट्रल प्रोविंस एंड बरार
    • अन्य नाम- ह्रदय प्रदेश, नदियों का मायका, कोहिनूर प्रदेश जनजाति प्रदेश, सोया प्रदेश, लघु भारत, आदिमानव की क्रीड़ा स्थली, सर्वाधिक वनाच्छादित प्रदेश, तेन्दु पत्ता प्रदेश, दलहन प्रदेश, सर्वाधिक राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य वाला प्रदेश, टाइगर स्टेट (सर्वाधिक बाघों वाला राज्य )|
    • प्रागैतिहासिक काम में मध्य प्रदेश – भारत में प्रागैतिहासिक मानव के निवास स्थल के रूप में रायसेन जिले के भीमबेटका से साक्ष्य प्राप्त होते हैं ! भीमबेटका की खोज वर्ष 1957-58 में डॉक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर ने की थी ! मध्य प्रदेश में प्रथम मानव साक्ष्य सीहोर जिले के अंतर्गत बुधनी तहसील के समीप हथनोरा से नर्मदा घाटी के तट पर 5 दिसंबर 1982 को होशंगाबाद जिले के निवासी डॉ अरुण सोनाकिया ने प्राप्त किए थे जिसे नर्मदा मानव एवं नर्मदा कपाल का नाम प्रदान किया गया है इस तथा इसके अवशेष नागपुर संग्रहालय में संरक्षित किए गए भारत में सर्वप्रथम कृषि एवं पशुपालन के साक्ष्य मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में आजमगढ़ से प्राप्त हुए हैं |
    • वैदिक काल में मध्य प्रदेश – वैदिक साहित्यों में मध्यप्रदेश का उल्लेख दक्षिणापथ एवं रेवोत्तर के रूप में मिलता है! इसके अतिरिक्त मनु स्मृति में जो हिमालय और विंध्याचल पर्वत के बीच का हिस्सा और विनसन (जहां सरस्वती नदी का लोप हुआ ) के पूर्व में तथा प्रयाग के पश्चिम में स्थित है, वह मध्य प्रदेश है | 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व अंगुत्तर निकाय तथा भगवती सूत्र ग्रंथों में मध्य प्रदेश में अवस्थित 2 महाजनपदों अवन्ति एवं चेदि का उल्लेख मिलता है|
    • ब्रिटिश कालीन मध्य प्रदेश – नागपुर के भोंसले शासक रघुजी तृतीय के निधन के पश्चात् 11 दिसंबर, 1853 को अंग्रेजो ने नागपुर पर अधिपत्य स्थापित कर लिया था | उसके पश्चात् 13 मार्च, 1854 को मध्य प्रदेश के समस्त दक्षिण -पूर्वी भाग को बिटिश साम्राज्य में सम्मलित कर लिया गया था | 2 नवम्बर, 1861 को मध्यप्रांत तथा 24 अक्टूबर, 1936 को बरार प्रांत का गठन किया गया था|
    • स्वतंत्रता पश्चात मध्य प्रदेश – स्वतंत्रता पूर्व मध्य प्रदेश को मध्य प्रांत के नाम से जाना जाता था 15 अगस्त 1947 को प्रथम स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तत्कालीन राजधानी नागपुर में पंडित रविशंकर शुक्ला ने झंडा फहराया था | वर्ष 1947-48 से मध्य प्रदेश के गठन पूर्व 1 नवंबर 1956 तक मध्य प्रदेश को पार्ट – ए, बी एवं सी के रूप में विभक्त किया गया था, जिसमें मध्य भारत, भोपाल, विंध्य प्रदेश एवं महाकौशल प्रमुख प्रशासनिक केंद्र स्थित थे|
    • मध्य प्रदेश से पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना – मध्य प्रदेश के दक्षिण पूर्वी भाग में स्थित 3 संभाग एवं 16 जिलों को पृथक कर 1 नवंबर, 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना की गई|
    • मध्यप्रदेश राज्य की प्रशासनिक राजधानी – भोपाल
    • मध्य प्रदेश राज्य की व्यावसायिक राजधानी – इंदौर
  • मध्य प्रदेश का भूगोल (भाग-1)

    मालवा का पठार
    मालवा का पठार मध्य प्रदेश के भौगोलिक विभाग में मध्य उच्च प्रदेश का भाग है! सामान्यतः मध्य प्रदेश को भौगोलिक दृष्टि से 03 भागों में बांटा गया है!- (अ ) मध्य उच्च प्रदेश, मध्य भारत का पठार, बुंदेलखंड, मालवा, रीवा- पन्ना, नर्मदा सोन घाटी (ब ) सतपुड़ा मैकल श्रेणी, (स ) पूर्वी पठार (बघेलखंड) मालवा का पठार, मध्य उच्च प्रदेश का ही भाग है!
    मालवा पठार की उत्पत्ति: मालवा का पठार एक लावा पठार है. जिसकी उत्पत्ति क्रिटेशिया काल में हुई जब भारत अफ्रीका से हट कर उत्तर की ओर उन्मुख हुआ !जब भारत अफ्रीका से टूटा तो भ्रंशन के कारण लावा प्रवाह हुआ एवं दक्कन के पठार का निर्माण हुआ एवं भारत पुनः उत्तर की ओर बढ़ा तो रीयूनियन हॉट-स्पॉट से गुजरा और पुनः लावा प्रवाह हुआ, जिससे मालवा का पठार बना!

    • मालवा के पठार में सम जलवायु पाई जाती है ! यहां औसतन 75 सेमी. तkक वर्षा पाई जाती है!
    • यहां पर शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं!
    • लावा पठार पर बेसाल्ट चट्टानों द्वारा काली मृदा का विकास हुआ है!
    • काली मृदा पर यहां गेहूं सोयाबीन व कपास की फसल मुख्य रूप से होती है ।
    • चंबल, सिंधु, पार्वती, कालीसिंध, क्षिप्रा नदियों द्वारा प्रवाहित इस क्षेत्र में सिंचाई नलकूप व कुओं द्वारा की जाती है ।
    • यह क्षेत्र औद्योगिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां प्रमुखतः इंदौर, देवास, पीथमपुर, मक्सी, धार, रतलाम, जावरा, मेधनगर जैसे ओधोगिक क्षेत्र हैं !
    • मानव संसाधन की दृष्टि से मालवा प्रदेश जनजाति बाहुल्य है! यहां सर्वाधिक भील जनजाति का निवास है !
    • मालवा प्रदेश की प्रमुख समस्या भू जल संकट है ! यह प्रदेश जल के अविवेकपूर्ण दोहन के कारण जल संकट से जूझ रहा है!
  • Time Sequence

    TIME SEQUENCE

    In time sequence, we have to detect exact time/a particular day/a particular day on the basis of several statements provided in the question.

    To solve problems related to time
    sequence, let us gather first the
    following informations :
    1 Minute = 60 seconds
    1 Hour = 60 minutes
    1 Day= 24 hours
    1 Week = 7 days
    1 Month = 4 weeks
    1 Year= 12 months
    1 Ordinary year = 365 days
    1 Leap year =366 days
    1 Century=100 years

    Remember
    • A day is the period of the earth’s
    revolution on its axis.
    • A ‘Solar year’ is the time taken the
    earth to travel round the sun. It is equal to 365 days, 5 hours, 48 minutes and 47 1/2 seconds nearly.
    • A ‘Lunar month’ is the time taken
    by the moon to travel round the
    earth. It is equal to nearly 28 days.

    Leap Year
    • If the number of a given year is
    divisible by 4, it is a leap year.
    Hence, the years like 1996, 2008,
    2012 are leap years. But years like
    1997, 1991, 2005, 2007 are not
    divisible by 4 and therefore, such
    years are not leap years.
    • In a leap year, February has 29 days
    • A leap year has 52 weeks and 2 days
    Therefore, a leap year has 2 odd days.

    Ordinary year
    • An ordinary year has 12 months
    • An ordinary year has 365 days,
    • An ordinary year has 52 weeks and 1 day. Therefore, an ordinary year has 1 odd day

    Century (100 years)
    • A century has 76 ordinary years
    and 24 leap years.
    • A century has 5 odd days.

    Odd days
    Odd days in an ordinary year = 1
    Odd days in a leap year=2
    Odd days in 100 years = 5
    Odd days in 200 years =(5×2) = 1 week + 3 days = 3
    Odd days in 300 years =(5×3) = 2 weeks + 1 day=1
    Odd days in 400 years =(5×4+1) = 21 days = 3 weeks + 0 day=0
    Similarly, each 800, 1600, 2000, 2004, etc. has 0 odd days.

    >> EXAMPLE 1. Neena returned home
    after 3 days earlier than the time she had told her mother. Neena’s sister Veena reached five days later than the day Neena was supposed to return. If Neena returned on Thursday, on what day did Veena return?
    Sol. Neena returned home on Thursday.
    Neena was supposed to return 3
    days later, i.e., on Sunday. Veena returned five days later from
    Sunday. i.e., on Friday.