प्रवर्तन निदेशालय

इस लेख मे प्रवर्तन निदेशालय को संक्षिप्त में विश्लेषित किया गया है

इस लेख मे प्रवर्तन निदेशालय को संक्षिप्त में विश्लेषित किया गया है।

प्रवर्तन निदेशालय

स्थापना की तारीख – 1 मई 1956
मातृ संस्था – वित्त मंत्रालय राजस्व विभाग
मुख्यालय – नई दिल्ली भारत
शासी निकाय – भारत सरकार
कार्यपालक – संजय कुमार मिश्रा आई आर एस
निदेशक – सीमांचल दास आई आर एस विशेष निदेशक
सामान्य प्रकृति – फेडरल लॉ एनफोर्समेंट नागरिक संस्था

भूमिका
प्रवर्तन निदेशालय एक बहु अनुशासनात्मक संगठन है जो वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग का हिस्सा है। यह दो विशेष राजकोषीय कानूनों – विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) और धन की रोकथाम अधिनियम, 2002 (पी.एम.एल.ए.) के प्रावधानों को लागू करने का कार्य करता है। सीधी भर्ती द्वारा कर्मियों की नियुक्ति के अलावा निदेशालय प्रतिनियुक्ति पर विभिन्न जाँच एजेंसियों, सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क, आयकर, पुलिस आदि विभागों से भी अधिकारियों को नियुक्त करता है।

अधिकार एवं शक्तियाँ
एक बहुआयामी संगठन की भूमिका में निदेशालय दो कानूनों को लागू करता है, जो निम्नलिखित हैं:

1. विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम – यह एक नागरिक कानून है, जो निदेशालय को अर्ध न्यायिक शक्तियाँ देता है।
यह निदेशालय को विनिमय नियंत्रण कानून के संदिग्ध उल्लंघनों की जाँच करने के साथ दोषी पर जुर्माना लगाने की भी शक्ति देता है।

2. धन शोधन निवारण अधिनियम – यह एक आपराधिक कानून है, जो निदेशालय के अधिकारियों को अनंतिम रूप से जाँच पड़ताल करने, पूछताछ करने और जुर्माना लगाने का अधिकार देता है।
यह कानून अधिकारियों को कालाधन के कारोबार में लिप्त व्यक्तियों को गिरफ्तार करने और मुकदमा चलाने के अलावा अपराधिक कृत्यों से प्राप्त संपत्ति को संलग्न/जब्त करने का अधिकार भी देता है।

निदेशालय के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:

• विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के प्रावधानों के उल्लंघन की जाँच करना, जो 1.6.2000 से प्रभाव में आया।

• निदेशालय नामित अधिकारियों द्वारा फेमा के उल्लंघन के दोषियों की जाँच की जाती है और इसमें शामिल राशि का तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम, 2002 (PMLA) के प्रावधानों के तहत (जो 1.7.2005 से प्रभावी हुआ) धन शोधन के अपराधों की जाँच करना, संपत्ति की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई करना और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा चलाना (28 कानूनों के तहत 156 अपराध हैं, जो पी.एम.एल.ए. के तहत अनुसूचित अपराध हैं।)

• निरस्त विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (FERA) का (31.5.2002 तक के) उल्लंघन होने पर जारी किये गए शो कॉज नोटिस (कारण बताओ नोटिस) का न्याय निर्णयन करना, जिसके परिणामस्वरूप जुर्माना लगाया जा सकता है।
भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत भारत से भागे लोगों के मामले देखना।
• इस अधिनियम का उद्देश्य ऐसे भगोड़े आर्थिक अपराधियों को दंडित करना है जो भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर कानून की प्रक्रिया से बचने के उपाय खोजते हैं।
• FEMA के उल्लंघन के संबंध में विदेशी मुद्रा और संरक्षण गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 (COFEPOSA) के तहत निवारक निरोध के प्रायोजक मामले देखना।
• पी.एम.एल.ए. के प्रावधानों के तहत मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) और परिसंपत्तियों की बहाली से संबंधित मामलों में अन्य देशों को सहयोग प्रदान करना और ऐसे मामलों में सहयोग लेना।
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कुछ नियम,कानून और अधिनियमों का प्रयोग किया जाता है, जिनका उल्लंघन होने पर यह निदेशालय सक्रिय हो जाता है –

(1)भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018
(2) विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 (फेमा)
(3) विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम फेमा नियम
(4) धन शोधन निवारण अधिनियम ,2002 (पी एम एल ए)
(5) धन शोधन निरोधक अधिनियम (पी एम एल ए) नियम
(6) पी एम एल ए के तहत सूची बद्ध अपराध
(7) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम ,1947(फेरा)
(8) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम 1947 (संशोधित फेरा)
(9) विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम 1973(FERA)

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